अब विराट कोहली को गाली देने से क्या हो जाएगा

viratकल जब एक दुकान पर पहुंचा तो उसमें काम करने वाले दो लड़कों की रोचक बातचीत सुनने को मिली। एक लड़का दूसरे से कह रहा था कि विराट कोहली और दूसरे कुछ भारतीय क्रिकेटर पैसे लेकर चैंपियंस ट्रोफी का फाइनल मैच हार गए। मैंने उनसे पूछा कि उन्होंने किससे पैसे लिए तो वे झेंप गए। इस बीच दुकानदार ने उन्हें डांटा और काम पर लगने को कहा। मैं लौटते हुए उनकी बात पर सोच रहा था।

हमारे देश में क्रिकेटर्स को नायकत्व मिला हुआ है और नायक भला हार जाए, यह उसका प्रशंसक या भक्त कैसे स्वीकार कर सकता है। नायक हारा है तो इसके पीछे कोई खास वजह ही होगी। वह स्वाभाविक रूप से नहीं हार सकता। दुकान में काम करने वाले लड़के यह कल्पना ही नहीं कर पा रहे थे कि उनके नायक से कोई बेहतर भी हो सकता है और उनसे अच्छा खेलकर उन्हें हरा भी सकता है। इसलिए यह कहानी उन्हें राहत देती है कि विराट कोहली वगैरह पैसे लेकर हार गए।

दिलचस्प तो यह है कि कोहली और उनके मित्रों का रिश्वत लेना उनके नायकत्व को खंडित नहीं करता, उनकी हार उनके हीरोइजम को जरूर तार-तार करती है। अगर यह कहा जाता है कि क्रिकेट हमारे देश में धर्म बन चुका है तो गलत नहीं कहा जाता। अपनी धर्मिक आस्था को सही ठहराने के लिए भी लोग अजीबोगरीब किस्से गढ़ लेते हैं। क्रिकेट का यह हाल शायद इसलिए हुआ कि दूसरे खेलों की स्थिति बेहद खराब है। अगर दूसरे खेलों को भी तवज्जो मिले तो शायद सोच बदल सकती है लेकिन सबसे बड़ी बात है कि समाज में तर्कशीलता बढ़े। तभी खेल को खेल की तरह लिया जाएगा।

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