यूपी, बिहार से भी खराब हैं गुजरात के हालात: हाई कोर्ट

Gujrat High Courtगुजरात हाई कोर्ट ने बुधवार को कोडिनार हिंसा के मामले में सुनवाई करते वक्त टिप्पणी की कि राज्य में कानून-व्यवस्था की हालत यूपी, बिहार जैसे राज्यों से भी बदतर है। अदालत ने कहा कि यूपी और बिहार के बारे में हम जितना सुनते हैं, उससे ज्यादा खराब हालात खास तौर से राज्य के सौराष्ट्र प्रांत के कोडिनार शहर में हैं। अदालत की तरफ से यह टिप्पणी कोर्टरूम में कोडिनार हिंसा का विडियो देखने के बाद की गई।

विडियो देखकर जज स्तब्ध रह गए कि पिछले साल अक्टूबर में हुए कोडिनार हिंसा में किस तरह पुलिस पीड़ितों की जगह दंगाइयों का साथ दे रही थी। पीड़ित रफीक सलोत के घर पर जब दंगाई भीड़ हमला कर रही थी उस वक्त पुलिस मूकदर्शक बनी खड़ी थी। दंगों के आरोपी BJP सांसद दीनू बोघा सोलंकी पर कोई खास ऐक्शन न लेने के लिए पुलिस की लताड़ लगाते हुए जज जे बी पारदीवाला ने कहा, मैं बहुत कुछ कहना चाहता हूं लेकिन खुद को और टिप्पणियां करने से रोक रहा हूं।

कोर्टरूम में मौजूद मामले की जांच कर रहे पुलिसवालों ने कहा कि दंगाइयों की ज्यादा भीड़ होने के कारण वे उस वक्त कोई ऐक्शन नहीं ले पाए थे। इस पर कोर्ट ने उन्हें उनकी ड्यूटी याद दिलाते हुए पूछा कि उनको बंदूकें क्यों दी गई हैं और अब तक उन्होंने इस मामले में कोई गिरफ्तारी क्यों नहीं की। अदालत ने मामले में पुलिस की कमजोर FIR निरस्त करते हुए उन्हें पीड़ित रफीक सलोत की पत्नी जेतूबेन सलोत के बयान पर नई FIR लिखने का आदेश दिया। साथ ही CID (क्राइम) को मामले की जांच शुरू करने का निर्देश दिया।

सुनवाई के दौरान पुलिसवालों के व्यवहार पर गुस्साए जज ने कहा कि उनकी निष्क्रियता से यह मामला बड़े सांप्रदायिक दंगे का रूप ले सकता था क्योंकि भीड़ के पास जानलेवा हथियार थे और उसने अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य के घर पर हमला बोला था। याचिकाकर्ता सलोत के वकील आनंद यागनिक ने दंगे की विडियो सीडी कोर्ट में जमा करने के बाद यह आरोप लगाते हुए उन्हें कोर्टरूम में चलाए जाने पर जोर दिया था कि स्टेट अथॉरिटीज कोडिनार में सांसद सोलंकी का आतंक रोकने के लिए कुछ नहीं कर रही हैं।

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