आधार की अनिवार्यता पर सुनवाई पुरी, पांच जजों की पीठ सुनाएगी फैसला

supreme courtआधार की अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ ने सभी पक्षों पर सुनवाई पूरी करके फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब पांच जजों का संविधान पीठ तय करेगा कि आधार निजता के मौलिक अधिकार का उल्‍लंघन करता है या नहीं। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए के सिकरी, जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस अशोक भूषण की पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। इस मामले में 38 दिनों तक सुनवाई हुई।

आधार पर फैसला आने तक सामाजिक कल्‍याणकारी योजनाओं के अलावा बाकी सभी केन्‍द्र व राज्‍य सरकारों की योजनाओं में आधार की अनिवार्यता पर रोक लगाई गई है। इनमें मोबाइल सिम व बैंक खाते भी शामिल हैं। केन्‍द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बड़ा बयान दिया है कि सुप्रीम कोर्ट कहता है कि प्राइवेसी अधिकार है, प्राइवेसी जरूरी भी है लेकिन प्राइवेसी भ्रष्‍टाचारियों और आतंकियों की ढाल नहीं बन सकती है। आतंकवाद और सांप्रदायिकता के मुददों पर वैश्विक सर्वसम्‍मति होनी जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट में आधार कार्ड के खिलाफ कई याचिकाएं दाखिल हैं। जिन पर सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच सुनवाई कर रही है। मोबाइल और बैंक खातों के अलावा पासपोर्ट को आधार से लिंक करने की डेडलाइन भी बढ़ा दी है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जबतक मामले में कोई फैसला नहीं आ जाता है तब तक आधार लिंक करने का ऑप्‍शन खुला रहना चाहिए। इसके अलावा सख्‍त रुख अपनाते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया था कि सरकार आधार को अनिवार्य करने के लिए लोगों पर दबाव नहीं बना सकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने मोबाइल नंबर से आधार कार्ड लिंक करने के मामले में नया आदेश जारी किया था। इसके मुताबिक अब आपको नया सिम कार्ड लेने के लिए सिर्फ आधार देने की अनिवार्यता नहीं रहेगी। इसका मतलब यह है कि अब आप आधार के अलावा अन्य दस्तावेज देकर भी नया सिम कार्ड ले सकते हैं।

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