दिव्यांगों को सशक्त बनाने के लिए राष्ट्रीय सेमिनार में शिक्षाविदों के साथ कंपनियों ने लिया प्रण

disable seminarनई दिल्ली। समाज और देश को सशक्त बनाने के लिए जरूरी है कि हर स्तर पर लोग सशक्त हों। दिव्यांगों को भी अधिकार संपन्न और वित्तीय रूप से सामथ्र्यवान बना दिया जाए, तो वे भी समाज के मुख्यधारा में आकर अपने कर्तव्यों को बेहतर निर्वहन करेंगे। इसके लिए जहां सरकारी स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं कई स्वैच्छिक संस्था भी आगे आकर काम कर रही है। ये बातें दिव्यांगों के वित्तीय समावेशन पर आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी के दौरेान वक्ताओं ने कहीं। इसका आयोजन सोसाइटी फाॅर डिसएबिलिटी एंड रिहेबिलेशन स्टडीज, एसडीआरएस नई दिल्ली ने किया था।
इस सेमिनार में जहां कई क्षेत्रों से आए शिक्षाविदों ने अपने अपने विचार रखें। नाबार्ड, इंडियन आॅयल, यूको बैंक, स्टील अथाॅरिटी आॅफ इंडिया, कैनरा बैंक ने सेमिनार में अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की। दो दिवसीय सेमिनार में भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अनिल कुमार खाची,एसडीआरएस के डाॅ जीएन कर्ण, जेएनयू के पूर्व कुलपति प्रो सुधीर कुमार सपोरी, डाॅ. मदनेश कुमार मिश्र, आई.आर.एस. (संयुक्त सचिव, वित्तीय सेवा विभाग/वित्त मंत्रालय, भारत सरकार) डाॅ. एस. के. प्रसाद (भारत सरकार के उप-मुख्य विकलांगता आयुक्त), श्री पी.सी. दास, आई.सी.ए.एस. (अध्यक्ष-सह-प्रबन्ध निदेशक, नेशनल हैण्डीकैप्ड फाइनेन्स एण्ड डेवलपमेन्ट काॅरपोरेशन) तथा प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एवं भारतीय प्रबन्धन संस्थान, बंगलोर के प्रो. चरण सिंह सहित कई गणमान्य लोगों ने अपने विचार रखें। इसके साथ ही इग्नू के विकलांगता अध्ययन केंद्र के उपनिदेशक डाॅ एसके मिश्रा, भीमराव अंबेडकर काॅलेज के डाॅ जीके अरोडा, वारंगल आंध्रप्रदेश के डाॅ एम ममता, शिवकाशी तमिलनाडु के डाॅ आर रामर, दिल्ली विश्वविद्यालय के इंस्टीटयूट आॅपफ इकाॅनिमिक ग्रोथ के डाॅ सीएससी शेखर, प्रधानाचार्य डाॅ अशोक कुमार त्यागी ने अपने विचार रखें।

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