स्टार्टअप्स का सुपरहिट फॉर्मूला

startupभारत में स्टार्टअप सालाना 270 फीसदी के रेट से बढ़ रहे हैं. हर महीने 500से 800 नए स्टार्टअप शुरू होते हैं. और इस स्टार्ट अप के खले में सबसे आगे जो शहर है उसका नाम है बंगलुरु. कभी आईटी और गार्डन सिटी के नाम से मशहूर रहा यह शहर अब स्टार्टअप हब ऐसा उभरा है की इसने स्टार्ट अप के ट्रेंड में एक नए बिजनेस मॉडल को भी खड़ा कर दिया है यह मॉडल है को-वर्किंग स्पेस का. को वर्किंग हब नए जमाने का नया वर्क कल्चर है.

इसे अगर स्टार्टअप्स की लाइफलाइन भी कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी.मुंबई, दिल्ली और बंगलुरु जैसे शहरों में कई ऐसे कोवार्किंग हब जहां एक ही ऑफिस उया बिल्डिंग के टेल ढ़ेरों छोटी और बड़ी कम्पनियां एक ही डेस्क को दूसरी कम्पनी की डेस्क से साझा करके अपना काम कर रहे हैं.

न रेंटल ऑफिस के लिए भागदौड़ और न ही मेंटेनेंस, बिजलीपानी के बिल से लेकर इंटरनेट का चक्कर, सब कुछ सब को-वर्किंग स्पेस चलाने वाले की जिम्मेदारी होती है. और इस कल्चर प्लस पॉइंट यह है कि आपको कई रचनात्मक सोच वाले व्यक्तियों का साथ मिलता हो जो कई बार आपके काम को भी फायदा पहुंचता है.

कृतिका का आइडिया मिल  पुणे के एक घर से चलता है जो उनके परिवार का ही है. बस वह घर ऑफिस के तौर पर इस्तेमाल होता है. आइडिया मिल की खासियत यही है यहाँ को दिन के 8 घंटे के ऑफिस वाला नियम नहीं चलता है और सन्डे की छुट्टी वाला झंझट भी नहीं है. यानी जी इतवार को भी काम करना छटा है आइडिया मिल आ सकता है.

  • दुनिया के पहले आधिकारिक को-वर्किंग स्पेस की शुरुआत 2005 में सैन फ्रांसिस्को में एक प्रोग्रामर ब्रैड न्यूबर्ग ने की.
  • ग्लोबल को-वर्किंग सर्वे के मुताबिक 2016 के अंत तक 10000 नए को-वर्किंग स्पेस शुरू होने जा रहे हैं.
  • डिजिटल मार्केटिंग फर्म, गीगा हेल्थ के फाउंडर अभिजीत शिटुट 9 लोगों की टीम के साथ को-वर्किंग स्पेस से कारोबार चला रहे हैं

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