जीएसएलवी मार्क तीन का सफल प्रक्षेपण कर ISRO ने रचा इतिहास

पिछले पचास साल के दौर में भारत ने मंगलयान, चंद्रयान, मौसम आधारित उपग्रहों को प्रक्षेपित कर दिया है कि अब वो अमेरिका और रूस को टक्कर देने को तैयार है। इसरो ने आज एक बार फिर कहानी लिख दी है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से शाम 5.28 बजे जीएसएलवी मार्क तीन का सफल प्रक्षेपण किया गया।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी इस मौके पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि देश को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर गर्व है।

पीएम मोदी ने जीएसएलवी मार्क-3 की सफल लॉन्चिंग पर देश के वैज्ञानिकों को बधाई दी।

जीएसएलवी मार्क 3 की उंचाई 43.43 मीटर है और व्‍यास 4 मीटर। इसका वजन दो सौ हाथियों के बराबर है। यह 8 टन वजन ले जाने में सक्षम है। जीएसएलवी मार्क 3 को बनाने में 15 वर्ष के कठिन परिश्रम और करीब 300 करोड की लागत से इसका निर्माण हुआ है।

वर्तमान में भारत को 2.3 टन वजनी संचार सेटेलाइट को लांच करने के लिए बाहरी देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। जीएसएलवी मार्क 3 अपने साथ करीब चार टन वजनी जीसैट-19 को अपने साथ ले जाएगा। इस रॉकेट के कामयाब प्रक्षेपण से भारत खुद पर निर्भर होने के साथ व्यवसायिक इस्तेमाल कर सकेगा।

जीएसएलवी मार्क 3 के प्रक्षेपण में स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन का इस्तेमाल किया गया है। क्रायोजेनिक इंजन में लिक्विड ऑक्सीजन और हाइड्रोजन का इस्तेमाल होता है। इसरो के पूर्व चेयरमैन डॉ के कस्तुरीरंगन का कहना है कि जियो सिंक्रोनस मिशन को कामयाब बनाने की दिशा में ये पहला कदम होगा।

स्पेस में मानव को भेजने के लिए इसरो ने केंद्र सरकार से 12,500 करोड़ रुपये की मदद मांगी है। अगर केंद्र की तरफ से मदद मिली को इसरो सात साल में मानव को अंतरिक्ष में रख सकेगा। ह्यूमन स्पेस मिशन की तैयारी इसरो पहले ही कर चुका है। 2014 में स्पेस स्यूट और क्रू माड्यूल को तैयार किया गया था। स्पेस एजेंसी की तरफ से ये प्रस्ताव दिया गया कि भारत की तरफ से किसी महिला को स्पेस मिशन पर भेजा जाना चाहिए।

अब तक रूस, अमेरिका और चीन अंतरिक्ष में मानव को भेज चुके हैं। 12 अप्रैल 1961 को रूस के यूरी गागरिन वोस्टोक 1 स्पेसक्रॉफ्ट के जरिए स्पेस मिशन में कामयाबी हासिल की थी। अमेरिका ने एक महीने बाद 5 मई 1961 को एलन वी शेपर्ड को फ्लोरिडा से अंतरिक्ष में भेजा था। भारत के रमेश शर्मा 1984 में इसरो और रूस के संयुक्त अभियान में स्पेस पर झंडा गाड़ने में कामयाब रहे।

 

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