स्पीकर काका ने खा ली गार्ड की नौकरी

security guardअगर कोई सिक्यॉरिटी गार्ड VIP को पहचान न सके और उसे ऐंबुलेंस के लिए रिजर्व्ड जगह से गाड़ी हटाने के लिए कह दे तो उसके साथ क्या होगा? अगर गुजरात की बात करें तो न सिर्फ गार्ड बल्कि उसको नौकरी पर रखने वाली एजेंसी को भी बोरिया बिस्तर समटने का आदेश दे दिया जाता है।

गांधीनगर सिविल अस्पताल में एक 28 साल का गार्ड गुजरात विधानसभा के स्पीकर को पहचान नहीं पाया और उन्हें ‘काका’ कहकर पुकारा। सोमवार को राज्य सरकार ने अस्पताल में तैनात सिक्यॉरिटी एजेंसी को टर्मिनेशन नोटिस थमा दिया।

गार्ड किरन वघेला को लगा कि वह 65 वर्षीय स्पीकर रमनलाल वोरा को ट्रॉमा सेंटर के सामने से गाड़ी हटाने के लिए कहकर अपनी नौकरी कर रहे हैं। वघेला ने कहा, ‘मैं नहीं जानता था कि वह विधानसभा के स्पीकर हैं। मुझे लगा उनसे ट्रॉमा सेंटर के बाहर खड़ी गाड़ी को हटाने के लिए बोलकर अपना काम कर रहा हूं। मुझे चिंता थी कि इससे ऐंबुलेंस को यहां आने में दिक्कत होगी। मैंने उन्हें ‘काका’ कहकर बुलाया।’ यह वाकया बीते शनिवार की शाम का है। वघेला को इसके बाद काम से निकाल दिया गया।

किरन वघेला के साथ एक अन्य गार्ड संजय वघेला भी इस वाकये के वक्त साथ था और उस समय स्थिति को ठीक से न संभाल पाने की वजह से उसे भी नौकरी गंवानी पड़ी।

सोमवार को गांधी नगर सिविल अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट बिपिन नायक ने अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था देखने वाली एलीट सिक्यॉरिटी सर्विसेज को एक महीने का टर्मिनेशन नोटिस दे दिया जबकि इस एजेंसी को अप्रैल 2019 तक के लिए हायर किया गया था। इस एजेंसी ने अस्पताल में 93 गार्ड तैनात किए हुए हैं।

मेडिकल सुपरिंटेंडेंट बिपिन नायक ने कहा, ‘रममलाल वोरा वरिष्ठ नागरिक हैं और गार्ड्स को उनसे अच्छे से बात करनी चाहिए थे। गार्ड ने उन्हें काका कहकर बुलाया और यह स्वीकार करने लायक नहीं है। हमने गार्ड से लिखित में भी यह बयान लिया है कि उसने स्पीकर को काका कहा।’

स्वास्थ्य मंत्री शंकर चौधरी ने बताया, ‘राज्य स्वास्थ्य विभाग ने सिक्यॉरिटी एजेंसी को टर्मिनेट करने के लिए नहीं कहा।’ बीजेपी प्रवक्ता भरत पंड्या ने कहा, ‘मैं इस पूरे मामले से अवगत नहीं हूं। मैं गार्ड को नौकरी से हटाए जाने पर तभी कुछ कह पाऊंगा जब खुद वोरा जी से बात कर लूं।’ वहीं, स्पीकर वोरा ने अभी तक कोई टिप्पणी नहीं दी है।

यह वाकया बीते शनिवार को उस वक्त हुआ जब स्पीकर वोरा आंखों की जांच के लिए अस्पताल पहुंचे थे। उनके बेटे ने कथित तौर पर गाड़ी ट्रॉमा सेंटर के बाहर खड़ी कर दी थी जिससे ऐंबुलेंस का रास्ता रुक गया। गार्ड किरन वघेला स्पीकर के पास गया और गाड़ी कहीं और पार्क करने को कहा।

इस दौरान मौजूद दूसरे गार्ड संजय वघेला ने बताया, ‘जब स्पीकर ने ध्यान नहीं दिया तो गार्ड ने कहा, काका, अपनी गाड़ी यहां मत पार्क कीजिए। सुपरिंटेंडेंट ने ऑर्डर दिया है कि यहां इमरजेंसी के अलावा कोई गाड़ी खड़ी न हो।’ संजय ने बताया कि इसके बाद स्पीकर ने गुस्से में किरन से पूछा, ‘तुम मुझे नहीं जानते? और यह पूछकर वे अस्पताल में घुस गए।’

संजय ने बताया कि आंखों के डॉक्टर के न मिलने पर स्पीकर जल्दी ही बाहर आए और किरन की तरफ इशारा करते हुए सबसे पूछा, ‘इसको यहां क्यों रखा है अगर ये मुझे पहचानता ही नहीं?’ संजय ने बताया कि इस मामले में उनकी कोई गलती नहीं थी फिर भी उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ा। उन्होंने कहा, हम गरीब लोग हैं, हमने वाकई नहीं जानते थे कि वह स्पीकर हैं।

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