फिल्म समीक्षा- क्या फ्यूज हो जाएगी ट्यूब लाइट ?

tubelightट्यूबलाइट’ हॉलिवुड फिल्म ‘लिटल बॉय’ से इंस्पायर्ड है जिसे अलेजांद्रो मॉन्टवर्द ने निर्देशित किया है। यह बहुत ही सादगी से कही गई कहानी है। कहानी का बैकग्राउंट एक बहुत ही खूबसूरत उत्तर-पूर्वी भारत के शहर जगतपुर से शुरू होती है। कहानी उस दौर की है जब भारत और चीन के बीच युद्ध छिड़ा हुआ था। शहर के लोग लक्ष्मण की मासूमियत भरी बेवकूफियों पर हंसते हैं और उसका भरपूर फायदा उठाते हैं।
लक्ष्मण को बन्ने चाचा (ओम पुरी) ने पाला है। उन्होंने उसे हर मुसीबत में गांधी जी का ज्ञान इस्तेमाल करने की सीख दी है।
फिल्म में परिवार, विश्वास और देशभक्ति के मूल्यों पर बात की गई है लेकिन इन सबको लेकर फिल्म दर्शक को कन्विंस करने में नाकामयाब रहती है। बल्कि, सबकुछ इतना ज्यादा अच्छा-अच्छा भर दिया गया है कि आपको लगेगा कि आप सलमान की फिल्म देखने नहीं, बल्कि सत्संग में आए हैं।
प्रीतम के दिए गाने ‘नाच मेरी जान’ और ‘सजन रेडियो’ बहुत खूबसूरत बन पड़े हैं। फिल्म में शाहरुख का कैमियो काफी चर्चा में था। शाहरुख ने इसमें एक जादूगर गो-गो पाशा का महत्वपूर्ण रोल किया है। असीम मिश्रा का कैमरा वर्क बहुत खूबसूरत है।

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