युवाओं के लिए यह बुरी खबर पढ़ लीजिये

studyअगर दुनियाभर के आंकड़ों पर गौर करे तो यूरोप में 14.9 मिलियल लोग और अमेरिका में 5.7 मिलियन लोग हार्ट फेल्यर की समस्या से जूझ रहे है। भारत में हाल ही जनरल ऑफ प्रेक्टिस ऑफ कार्डियोवास्कुलर साइंसेज में प्रकाशित एम्स की स्टडी के अनुसार हार्ट फेल्यर से अमेरिका व यूरोप में 4 -7प्रतिशत के मुकाबले भारत में 30.8 फीसदी मृत्यु होती है।

3 अगर संपूर्ण बीमारी का बोझ देखे तो पता चलता है कि दुनिया की आबादी में भारत आंकड़ों में16 फीसदी है तो वर्ल्ड के क्रोनोरी हार्ट डिसीज़ बोझ में यह 25 फीसदी है और हाइपरटेंसिव 120 मिलियन है।

दुनियाभर के मुकाबले भारत में क्रोनोरी आर्टरी डिसीज़ (सी ए डी) से युवा लोग ज्यादा प्रभावित है। आमतौर पर सी ए डी पुरूषों में अगर 55 साल से पहले और महिलाओं में 65 साल से पहले हो जाएं तो उसे प्रीमेच्योर सी ए डी कहा जाता है लेकिन अगर यह बीमारी 40 साल से पहले हो तो माना जाता है कि यह युवाओं को अपनी चपेट में ले रही है।

भारत में दिन प्रति दिन हृदय रोग के मामले बढ़ते जा रहे हैं और अब तो यह रोग कम उम्र में ही दस्तक देने लग गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि 29 सितम्बर को विश्व हृदय दिवस को भारत के लिए यादगार दिवस के रूप मनाना होगा। एम्स में हृदय रोग विज्ञान विभाग के चिकित्सक डॉ. संदीप सेठ ने कहा, “अगर चार मुख्य जोखिम कारकों, जैसे- तंबाकू सेवन, अस्वस्थ्य आहार, शारीरिक गतिविधि न करना और शराब के सेवन को नियंत्रित कर लिया जाए तो हृदय रोग (सीवीडी) से होने वाली 80 प्रतिशत समयपूर्व मौतों से बचा किया जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.