बुजुर्ग माता पिता को बेघर करने वालों के खिलाफ रैंप-वाक आयोजित

Mothers Dayनई दिल्ली। बदलते परिवेश में रिश्तो की डोर लगातार ढीली होती जा रही है। रिश्तो का ताना बाना बिखरने से सामाजिक ढांचा भी कमजोर हो रहा है। रिश्तो की इसी डोर को मजबूत बनाने के लिए कड़कड़डूमा के हॉलमार्क बैंक्वेट में में डैज़ल वाक फॉर ह्यूमैनिटी का आयोजन किया गया। परीसा कम्यूनिकेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में विवाहित महिलाओं ने मॉडल्स की तरह रैंप-वाक कर हर किसी को हैरान कर दिया।
इस मौके पर कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव नसीब सिंह ने कहा कि आज जो लोग अपने बुजुर्ग माता-पिता को घर से बेघर करने से नहीं हिचकते। वो भूल जाते हैं कि इन्ही माता-पिता ने अपनी जिंदगी में तमाम दुःख उठाकर भी उनकी बेहतर परवरीश की थी। लेकिन अपनी मौज मस्ती के  लिए ऐसा काम करने वाली लोग भूल जाते हैं कि आने वाले समय में उन्हें भी बुजुर्ग बनना है और तब उनकी संतान भी उन्ही के पद चिन्हो पैर चलेगी।
गैर सरकारी संगठन अर्थ सेवियर्स फाउंडेशन के अध्यक्ष रवि कालरा ने इस अवसर पैर अपने अनुभव साझा करते हुए बताया की किस तरह संपन्न लोग भी अपने बुजुर्ग माता-पिता को लावारिश बताकर उनके आश्रम में छोड़ जाते हैं। ऐसे लोगो में स्वतंत्रता सेनानियों से लेकर सेना के अधिकारी, बड़े घरानो के बुजुर्गो से लेकर सरकारी सेवा में रह चुके वरिष्ठ अधिकारी तक शामिल हैं। रिश्तों का ये सामाजिक पतन बहुत विचारणीय है। हमें ऐसे लोगो का सामाजिक बहिष्कार करना चाहिए।
परीसा कम्यूनिकेशन की प्रबंध निदेशक तबस्सुम हक़ के अनुसार उनकी कंपनी ने अपनी जिम्मेदारी और सामाजिक सरोकार को ध्यान में रखकर यह आयोजन किया है। इस कोशिश से अगर कुछ लोग भी रिश्तो के महत्व को समझना लगे और एक भी बुजुर्ग बेघर होने से बच जाये तो हमें लगेगा कि हमारा प्रयास सफल हो रहा है।
DSC_1618इस अवसर पर इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ फैशन एंड टेक्नोलॉजी के चेयरमैन रतनदीप लाल और एम्ब्रोसिआ ब्लिस के निदेशक घनश्याम शर्मा ने रैम्पवॉक करने वाली महिलाओं को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया।

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