सोरायसिस- छूने से नहीं फैलती.. आत्मविश्वास से दूर होती है

psoriasisहर किसी को खूबसूरत दिखने की तमन्ना होती है और अगर किसी को त्वचा संबंधी रोग हो जाएं तो वह काफी डिप्रेस हो जाता है। कुछ ऐसा सोरायसिस से जुड़े रोग में होता है क्योंकि इस बीमारी में रोगी के किसी भी हिस्से में लाल रंग के सूखे चकते उभर आते है। सोरायिसस में त्वचा की कोशिकाएं तेज़ी से बनने लगती है जिसकी वजह से लाल रंग की मोटी परत जमा होने लगती है।

कई बार इनमें खून का रिसाव भी होने लगता है।  सोरायसिस सिर्फ त्वचा से जुड़ी समस्या नहीं है बल्कि यह लगातार,गंभीर और चिंताजनक बीमारी है जो लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को बहुत ज्यादा प्रभावित करती है। लगभग 30 फीसदी सोरायसिस पीड़ित लोगों को सोरायटिक आथ्र्राइटिस की समस्या हो जाती है या भविष्य में यह समस्या पनप सकती है। इसमें जोड़ बहुत ज्यादा प्रभावित होते है।

सोरायसिस होने के कई कारण हो सकते है जिसमें संक्रमण, अधिक धूम्रपान, पौष्टिक आहार न लेना, तेज धूप में रहना, त्वचा की देखभाल न करना और मौसम में लगातार बदलाव होना शामिल है। त्वचा से जुड़ी बीमारी होने के कारण सोरायसिस से जुड़े कई मिथ जुड़े हुए है। लोग इसे छुआछूत की बीमारी समझने लगते है लेकिन सच्चाई यह है कि साथ रहने व खाने पीने या छूने से यह बीमारी नहीं फैलती।

बीमारी को लेकर जागरूकता न होने की वजह से लोग सोरायसिस पीड़ित रोगियों के साथ भेदभाव करते है। उनके साथ बैठने, खाने पीने, जिम या सैलून इत्यादि शेयर करना पसंद नहीं करते। शादी जैसे मामलों में भी सोरायसिस पीड़ितों को सामाजिक व मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ती है। करियर की बात की जाएं तो उन्हें नौकरी पाने या आफिस में सभी के साथ काम करने में दिक्कत महसूस होती है।

इस बारे में नई दिल्ली के कंस्लटेंट त्वचा विशेषज्ञ डा. राजीव सीकरी कहते है, जब तक सोरायसिस से मिथक जुड़े रहेंगे  तब तक रोगी को यह बीमारी बार बार परेशान करेगी, क्योंकि इस बीमारी के बार बार बढ़ने का कारण मानसिक तनाव और डिप्रेशन मुख्य है। इसलिए इस बीमारी के लक्षणों और बीमारी से होने वाली रोगी की स्थिति के प्रति जागरूकता बढ़ाना बहुत जरूरी है क्योंकि सोरायसिस की यह बीमारी सिर्फ त्वचा तक ही सीमित नहीं है। आजकल कई बेहतरीन थेरेपियां मौजूद है, जिससे रोगी बिल्कुल साफ या तकरीबन साफ त्वचा पा सकते है। त्वचा विशेषज्ञों को सोरायसिस रोगियों को ऐसे इलाज और थेरेपियों के बारे में बताना चाहिए जिससे उनकी त्वचा साफ या काफी हद तक साफ हो जाएं ताकि उनकी जिंदगी बेहतर हो सके।’

हालांकि सोरायसिस का कोई स्थायी इलाज नहीं है लेकिन इसे दवाइयों और थेरेपी की मदद से मैनेज किया जा सकता है। किंतु चिंता का विषय यह है कि लोग सामाजिक डर से बीमारी को छिपाने की कोशिश करते है। इसलिए यह समझना बहुत जरूरी है कि अगर समय रहते बीमारी का इलाज न कराया जाएं तो यह पूरे शरीर पर भी फैल सकती है, वही समय पर इलाज कराके इसे बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है। अगर सोरायसिस की समस्या कम हो तो डाक्टर मरहम के साथ दवाइयां देते है। ज्यादा गंभीर मामलों में फोटो (लाइट) थेरेपी भी दी जा सकती है और बायोलोजिक्स जैसी एडवांस थेरेपी से रोगी बेहतर जिंदगी बिता सकते है।

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