सावधान- अब बोतल में बिकेगी हवा तैयार है बाजार

mineral water दिल्ली में जिस तरह से प्रदूशित हवा का हौवा खड़ा किया जा रहा है. उससे प्रदूशण दूर हो अथवा न हो बोतलबंद हवा का बाजार जरूर तैयार हो रहा है। संभव है दिल्ली समेत देश के अन्य महानगरों में बोतलबंद हवा बिकने लग जाए. यही वजह है कि तेजी से बढ़ते प्रदूषण से लोगों का भले ही स्वास्थ्य खराब हो रहा है लेकिन कनाडा की कंपनी ने इससे भी चांदी काटने का जरिया ढूंढ़ लिया है।

स्टार्टअप के रूप में शुरू हुई वाइटेलिटी एयरकंपनी जल्दी ही भारत में बोतलबंद शु़द्ध हवा शुरू करने वाली है। यह हवा 3 और 8 लीटर की बोतलों में उपलब्ध होगी। इनकी कीमत क्रमशः 1450 रुपए और 2800 रुपए होगी। बताया जा रहा है कि इस बोतल से एक सांस लेने की कीमत करीब 12.50 रुपए की पड़ेगी।

व्यावसायिक बुद्धि और नवोन्मेश की ललक हो तो बाजार में उम्मीदों के नए-नए द्वार आसानी से खुल जाते हैं। वैसे भी संभावनाओं का कभी अंत नहीं होता। वाकपटु लोग गंजों को भी कंघी बेचने में कामयाब हो जाते हैं। कनाडा की कंपनी वाइटैलिटी एयर बैंफ एंड लेक ने कुछ ऐसा ही अनूठा करिष्मा कर दिखाया है। कंपनी ने वनाच्छादित पहाड़ों और जंगलों की हवा को बोतलबंद पानी की तरह बेचने का धंधा शुरू किया है। बोतल में बंद हवा बेचने का यह अवसर दुनिया में बढ़ते वायु प्रदूषण ने  दिया है।

औद्योगिक घरानों के दबदबे के चलते औद्योगिक उत्पादन घटाना तो मुश्किल है, ऐसे में कारोबारियों को बोतलबंद हवा के रूप में नया सुरक्षा कवच मिल गया है। मसलन बाजार में कारों के साथ हवा का बाजार तो बढ़ेगा किंतु इस महंगी हवा को खरीदकर इस्तेमाल करना गरीब के वश की बात नहीं है।

वैसे तो अमेरिका और मध्य पूर्व के कई देषों में हवा का कारोबार मृगछौने की तरह खूब कुलांचें मारने लगा है लेकिन चीन के वायुमंडल में छाये वायु प्रदूषण से इसमें भारी उछाल आया है। हालत यह है कि चीन में लोग उपहार के तौर पर बोतलबंद हवा अपने रिश्तेदारों और मित्रों को देने लगे हैं। ऐसे में सोचनीय सवाल है कि  हवा का यह कारोबार भारत में कारगर साबित होगा. हवा में घुलते इस जहर का असर केवल महानगरों में ही नहीं छोटे नगरों में भी प्रदूषण का सबब बन रहा है।

देश फैल रही इस जहरीली हवा इस बात की तस्दीक है कि बोतलबंद हवा का जो कारोबार भारत में षुरू हाने जा रहा है.  इसका विस्तार दिन दूना रात चैगूना फैलने की उम्मीद है। कंपनी के संस्थापक मोसेज लेम का कहना है कि उनके द्वारा बाजार में लाई गई थैलियों की पहली खेप तुरंत बिक गई। इससे उनके हौसले को बल मिला और फिर इस कारोबार को फुलटाइम व्यवसाय में बदल दिया। कंपनी ने हाल ही में चीन में बोतलबंद हवा का व्यापार शुरू किया है।

यहां कारोबार के उद्घाटन वाले दिन ही 500 बोतलें हाथों-हाथ बिक गईं और अब अमेरिका व मध्य पूर्व के देषों के बाद चीन बोतलबंद हवा का सबसे बड़ा खरीददार देष बन गया है। भारत में खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी इस जहरीली हवा के चलते कंपनी भारत में कारोबार करने जा रही है। कंपनी के संस्थापक लेम का कहना है कि 2015 की गर्मियों में कनाडा के कलागेरी नामक स्थान पर जंगल में अग लग गई थी,  तब पूरे क्षेत्र में धुआं ही धुआं फैल गया था। लोगों को सांस लेना मुश्किल हो रहा था।

तब उन्हें बोतलबंद हवा बाजार में उतारने का आइडिया मिला। दिल्ली में यही स्थिति पड़ौसी राज्य हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में पराली में बन गई है। भारत में इसी महीने यह कंपनी बाजार में शुद्ध हवा का कारोबार शुरू करने जा रही है। लेकिन कृत्रिम हवा की यह उपलब्धता यह आशंका भी उत्पन्न करती है कि कहीं भारत में वायु प्रदूषण से मुक्ति के जो उपाय हो रहे हैं, उन्हें हवा का बाजार ठेंगा न दिखा दे क्योंकि बोतलबंद पानी आने के बाद जलस्त्रोतों का भी यही हश्र हुआ है।

लेखक : प्रमोद भार्गव

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