कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स में मीराबाई चानू ने भारत के लिए पहला गोल्‍ड मेडल जीता बनाया नया रिकॉर्ड

Mirabai Chanuऑस्‍ट्रेलिया के गोल्‍ड कोस्‍ट में राष्‍ट्रमंडल खेलों में मीराबाई चानू ने 48 किलोग्राम के भारोत्‍तोलन में पहला गोल्‍ड मेडल जीता। इसके साथ ही अपना खुद का ही रिकॉर्ड तोड़ दिया है।

स्नैच राउंड में पहले उन्होंने 80, फिर 84 और तीसरी बार में 86 किलो भार उठा कर अपने लिए स्वर्ण पदक सुरक्षित किया। स्नैच कैटगरी में वो पहले ही 8 किलो भार अधिक उठाने में आगे चल रही थीं. 86 किलो भार उठा कर उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स का रिकॉर्ड भी कायम किया है। इसके बाद क्लीन एंड जर्क राउंड में मीराबाई चानू ने पहली कोशिश की और 103 किलोग्राम उठाया। दूसरी बार उन्होंने अपने ही पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स के 103 के रिकॉर्ड को तोड़ कर 107 किलोग्राम उठाया। तीसरी बार मीराबाई ने 110 किलो उठा कर औरों से 13 किलोग्राम की बढ़त हासिल कर ली। वहीं दूसरे स्थान पर रहीं मॉरीशियस की मारिया हानिट्रा रोलिया, जिनका टोटल रहा 170 किलोग्राम रहा।

‘डिड नॉट फ़िनिश’- ओलपिंक जैसे मुकाबले में अगर आप दूसरे खिलाड़ियों से पिछड़ जाएँ तो एक बात है, लेकिन अगर आप अपना खेल पूरा ही नहीं कर पाएँ तो ये किसी भी खिलाड़ी के मनोबल को तोड़ने वाली घटना हो सकती है। 2016 में भारत की वेटलिफ़्टर मीराबाई चानू के लिए ऐसा ही हुआ था। ओलंपिक में अपने वर्ग में मीरा सिर्फ़ दूसरी खिलाड़ी थीं जिनके नाम के आगे ओलंपिक में लिखा गया था ‘डिड नॉट फ़िनिश’। जो भार मीरा रोज़ाना प्रैक्टिस में आसानी से उठा लिया करतीं, उस दिन ओलंपिक में जैसे उनके हाथ बर्फ़ की तरह जम गए थे। उस समय भारत में रात थीं, तो बहुत कम भारतीयों ने वो नज़ारा देखा। सुबह उठ जब भारत के खेल प्रेमियों ने ख़बरें पढ़ीं तो मीराबाई रातों रात भारतीय प्रशंसकों की नज़र में विलेन गईं। नौबत यहाँ तक आई कि 2016 के बाद वो डिप्रेशन में चली गईं और उन्हें हर हफ्ते मनोवैज्ञानिक के सेशन लेने पड़े। इस असफलता के बाद एक बार तो मीरा ने खेल को अलविदा कहने का मन बना लिया था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और पिछले साल ज़बरदस्त वापसी की।

Mirabai Chanu wins gold medal in weightliftingवैसे 23 साल, 4 फ़ुट 11 इंच की मीराबाई चानू को देखकर अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल है कि देखने में नन्ही सी मीरा बड़े बड़ों के छक्के छुड़ा सकती हैं। 48 किलोग्राम के अपने वज़न से क़रीब चार गुना ज़्यादा वज़न यानी 194 किलोग्राम उठाकर मीरा ने पिछले साल वर्ल्ड वेटलिफ़्टिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीता। पिछले 22 साल में ऐसा करने वाली मीराबाई पहली भारतीय महिला बन गई थीं। 48 किलो का वज़न बनाए रखने के लिए मीरा ने उस दिन खाना भी नहीं खाया था। इस दिन की तैयारी के लिए मीराबाई पिछले साल अपनी सगी बहन की शादी तक में नहीं गई थीं। भारत के लिए पदक जीतने वाली मीरा की आँखों से बहते आँसू उस दर्द के गवाह थे जो वो 2016 से झेल रही थीं।

Mirabai-Chanu8 अगस्त 1994 को जन्मी और मणिपुर के एक छोटे से गाँव में पली बढ़ी मीराबाई बचपन से ही काफ़ी हुनरमंद थीं। बिना ख़ास सुविधाओं वाला उनका गांव इंफ़ाल से कोई 200 किलोमीटर दूर था। उन दिनों मणिपुर की ही महिला वेटलिफ़्टर कुंजुरानी देवी स्टार थीं और एथेंस ओलंपिक में खेलने गई थीं। बस वही दृश्य छोटी मीरा के ज़हन में बस गया और छह भाई-बहनों में सबसे छोटी मीराबाई ने वेटलिफ़्टर बनने की ठान ली।

मीरा की ज़िद के आगे माँ-बाप को भी हार माननी पड़ी। 2007 में जब प्रैक्टिस शुरु की तो पहले-पहल उनके पास लोहे का बार नहीं था तो वो बाँस से ही प्रैक्टिस किया करती थीं। गाँव में ट्रेनिंग सेंटर नहीं था तो 50-60 किलोमीटर दूर ट्रेनिंग के लिए जाया करती थीं। डाइट में रोज़ाना दूध और चिकन चाहिए था, लेकिन एक आम परिवार की मीरा के लिए वो मुमकिन न था। उन्होंने इसे भी आड़े नहीं आने दिया। 11 साल में वो अंडर-15 चैंपियन बन गई थीं और 17 साल में जूनियर चैंपियन। जिस कुंजुरानी को देखकर मीरा के मन में चैंपियन बनने का सपना जागा था, अपनी उसी आइडल के 12 साल पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड को मीरा ने 2016 में तोड़ा- 192 किलोग्राम वज़न उठाकर।

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