एमसीडी ने किया दिल्ली का कचरा कोई तो झाडू चलाओ यारो

mcdईस्ट दिल्ली में का कचरा उठता नहीं पड़े पड़े सड़ता है. यकीन नहीं आता तो ये तस्वीरे देख लो. आज की हैं. एक दम ताजा. कृष्णा नगर के ओल्ड अनारकली की एक गली भर का नजारा है यह. जिन लोगों को मोदी जी छप्पन इंच की फोटोशॉप वाली अखबारी फोटो देखने की आदत पड़ चुकी हैं, उन्हें शायद यह कडवी सच्चाई अच्छी न लगे लेकिन यहाँ के हम बाशिंदे इन तस्वीरों की सच्चाई का दंश झेल रहे हैं.

देख कर अंदाजा लग गया होगा कि एक घर के सामने अघोषित कूड़ा घर स्थापित हो चुका हैं वहीँ एक कीचड़ से बजबजाती नाली का पानी बदबू और बीमारी दोनों फैला रहा है. इस इलाके के कृष्णा नगर, अर्जुन नगर, राम नगर, रशीद मार्केट, चन्दन नगर, राधे पुरी और वेस्ट आजाद नगर आदि में ऐसे ही न जाने कितने ढेर हैं जहाँ दिन रात कूड़ा पड़ा पड़ा इस इंतेजार में सड़ता रहता है कि आज नहीं तो कल एमसीडी वाले आकर इसे उठा ले जायेंगे. लेकिन ये नहीं आते.

हम भी मजबूर हैं. क्या करें. मुंह पर रुमाल रखकर किसी तरह बदबू से निबट रहे हैं. एमसीडी भी अपनी काहिली से मजबूर है. उसे तो ईस्ट दिल्ली को कचरे का ढेर बनाने की पड़ी है. देश में सबसे अधिक ठोस कचरा पैदा करने वाले नगर निकाय में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहले स्थान पर है। उद्योग संगठन फिक्की ने देश के 22 शहरों के सर्वे के बाद यह निष्कर्ष निकाला है।

इसके अनुसार दिल्ली में हर दिन 6800 टन ठोस कचरा पैदा होता, जबकि मुंबई में यह मात्रा 6500 टन है। सर्वे में कहा गया है कि कचरा प्रबंधन की वैज्ञानिक व्यवस्था नहीं होने के कारण ये शहर इस कचरे को जमीन पर ही इधर-उधर डाल रहे हैं। इसमें देश में ठोस कचरे के प्रबंधन की कमी का जिक्र भी किया गया है। इसमें कहा गया है कि मुंबई में पूरे का पूरा यानी 100 प्रतिशत ठोस कचरा इधर-उधर (डंपिंग साइट पर) डाला जाता है। दिल्ली में यह मात्रा 94 प्रतिशत है।

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