मौत’ का या रेल का सफर ?

trainnssरेल दुर्घटनाओं में हर साल होने वाली मौत के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर का खराब रखरखाव और अपग्रेडेशन न होना तो जिम्मेदार है ही इसके अलावा इसका एक और बड़ा कारण है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह कारण बड़ी संख्या में सेफ्टी स्टाफ की कमी है। सेफ्टी कैटिगरी में करीब 1.27 लाख कर्मचारियों का पद अब तक खाली है।

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सेफ्टी एंप्लॉयीज में ट्रैकमेन, पॉइंटमेन, पैट्रोलमेन, टेक्निशंस और स्टेशन मासटर्स शामिल हैं। वे हमारी ट्रेनों के सुरक्षित संचालन के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार होते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस अहम चीज की कमी यात्रियों के जीवन को खतरे में डालती है।

बड़ी संख्या में सेफ्टी स्टाफ की कमी होने से मौजूदा वर्कर्स को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। उनको एक दिन में 15 घंटे से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे गलती की संभावना बनी रहती है।

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डिजाइनर यूनिफॉर्म्स’ और ब्रैंडिंग की अन्य कवायद में रेलवे तो दिल खोलकर खर्च करता है लेकिन जब सुरक्षाकर्मियों के खाली पदों को भरने की बात आती है तो सांप सूंघ जाता है।

साल 2013 तक की बात करें तो इस तरह के खाली पदों की संख्या 1.42 लाख थी जो तीन साल में सिर्फ 19,500 कम हुई है। रेलवे मंत्रालय से प्राप्त सूचना के मुताबिक, रेलवे में 2.17 लाख कर्मचारियों की कमी है, जिनमें से 56 फीसदी या 1.27 लाख सेफ्टी कैटिगरी में है।

ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन (एआईआरएफ) के जनरल सेक्रटरी शिव गोपाल मिश्रा ने बताया, ‘जहां हमें तीन पैट्रोलमेन की जरूरत होती है, वहां एक भी नहीं है।’

उन्होंने बताया, ‘एक ट्रैकमैन एक दिन में 12-13 घंटे काम करता है। किसी को बीमार पड़ जाने या हाई मेंटेनेंस के दिन उनको इससे भी ज्यादा समय तक काम करना पड़ता है। एक ट्रैकमैन को औसतन 15-17 किलोग्राम वजन का उपकरण ढोना पड़ता है और हमें चाहे सर्दी हो या तपती गर्मी का मौसम, काम करना पड़ता है। हमें मौसम के कहर से कोई राहत नहीं मिलती। लेकिन इस सबके बावजूद भी हम सिर्फ यही उम्मीद करते हैं कि कम से कम खाली पदों को भरा जाए ताकि हमें कम से कम उतनी छुट्टी तो मिले, जितना हमारा हक है।’

18 रेलवे डिविजन में से ज्यादातर वेकंसी नॉर्दर्न डिविजन में 14,442 है। इसके बाद ईस्ट सेंट्रल में 10,034 वेकंसी, साउथ ईस्टर्न में 9,967 वेकंसी और सेंट्रल में 9,910 वेकंसी है। नॉर्थ सेंट्रल डिविजन जिसके अधिकार क्षेत्र में रविवार का हादसा हुआ है, करीब 9,223 सेफ्टी एंप्लॉयी के पद खाली पड़े हैं।

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