कोविंद जीत तो गए लेकिन फायदा किसी और का होगा?..

kovindरामनाथ कोविंद गुरुवार को देश के 14वें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए। उनकी यह जीत बीजेपी की अगुआई वाले एनडीए गठबंधन को नई ताकत देगी। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि 2019 आम चुनाव से पहले बीजेपी को मिली इस कामयाबी के दूरगामी राजनीतिक असर होंगे। विपक्ष नेताओं की ओर से एनडीए के पक्ष में हुई क्रॉस वोटिंग से भी बीजेपी उत्साह से लबरेज है। वहीं, कोविंद के जरिए मिली सियासी जीत से पार्टी में पीएम नरेंद्र मोदी और अध्यक्ष अमित शाह का कद और ऊंचा होगा।
बीजेपी का आकलन है कि कोविंद को न केवल एनडीए समर्थक पार्टियों, बल्कि 115 अतिरिक्त विधायकों के भी वोट मिले। 18 एनडीए पार्टियों के अलावा कोविंद को जेडीयू, टीआरएस, कांग्रेस, एआईएडीएमके, बीजेडी जैसे क्षेत्रीय दलों के वोट मिले। कोविंद के लिए वोटिंग के मामले में बीजेपी कई राज्यों में विपक्षी पार्टियों में सेंध लगाने में कामयाब रही। वहीं, विपक्ष अपने उम्मीदवार मीरा कुमार के लिए 240 सांसदों के वोट मिलने की उम्मीद कर रहा था, लेकिन उसे केवल 225 का ही समर्थन मिला।
बीजेपी विपक्ष से मिले इस समर्थन को भारत भर में जमीन मजबूत करने की कोशिशों से जोड़कर देख रही है। पार्टी को उम्मीद है कि अब उसे देश के उन क्षेत्रों में पहुंचने में मदद मिलेगी, जहां अभी बीजेपी का कोई आधार नहीं था। बीजेपी के राज्यसभा सांसद भूपेंद्र यादव ने कहा, ‘2019 चुनाव से पहले ज्यादा व्यापक और मजबूत गठबंधन बनाने की हमारी कोशिशों के संदर्भ में यह एक अच्छा संकेत है। इससे साबित होता है कि बीजेपी की देश के विभिन्न इलाकों और पार्टियों में स्वीकार्यता बढ़ रही है।’
कोविंद को मिली जीत से पार्टी के अंदर नरेंद्र मोदी-अमित शाह की जोड़ी की कार्यशैली और दूरदृष्टि के मुरीद लोगों की तादाद और बढ़ गई है। दोनों के कामकाज के तौर-तरीके पर फिलहाल कोई उंगली उठने वाली नहीं है। ऐसा माना जाता है कि पार्टी के भीतर छोटे से लेकर बड़े फैसले लेने तक में नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ‘पंचायत’ की पक्षधर नहीं है। सभी फैसले दोनों के आपसी विमर्श के जरिए होते हैं, इसकी जानकारी बाद में पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं को दी जाती है।
पार्टी सूत्र कहते हैं कि इसी वजह से हर फैसले की कामयाबी-नाकामयाबी का असर सीधे तौर पर इस जोड़ी पर होता है। अब पार्टी से जुड़े फैसले लेने को यह जोड़ी और ज्यादा स्वतंत्र होगी। पार्टी के सीनियर मोस्ट नेताओं का एक गुट जो इस जोड़ी के खिलाफ आवाज उठने की उम्मीद बनाए हुए है, उसकी उम्मीदों को झटका लग सकता है।

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