किया डांस से इनकार तो महिला डांसर को गोली मारकर की हत्या

kulvinderkairउस बैंक्वेट हॉल में शादी की पार्टी चल रही थी. मेहमानों की खातिरदारी के लिए एक के बढ़ कर एक लज़ीज़ खाने के साथ-साथ बाकायदा डांसर भी बुलाए गए थे. हर कोई थिरक रहा था. एक कैमरा इस यादगार पल को हमेशा-हमेशा के लिए कैद भी कर रहा था. लेकिन तभी अचानक स्टेज के नीचे से एक गोली चलती है. बिल्कुल लाइव. फिर मौत आती है. वो भी लाइव. लेकिन ये वारदात अक्सर खुशियों के मौके पर होने वाली फायरिंग और उससे होने वाली मौतों से ज़रा हट कर है. क्योंकि ये मौत महज़ एक्सीडेंट नहीं, बल्कि इसके पीछे वजह गुस्से की है.
खुशी के मौके पर मौत के सामान की क्या जरूरत? आखिर क्यों लोग अपनी खुशियों का इजहार गोलियां चला कर करते हैं? आखिर खुशी के इजहार के हजार दूसरे तरीके मौजूद हैं. मगर लोग समझें तब ना. वैसे भी सिर्फ बठिंडा में ही जश्न मातम में तब्दील नहीं हुआ है. ऐसी ना मालूम कितनी ही मिसालें हैं. दिल्ली की जेसिका लाल तो याद होगी आपको, जिसे एक रईसज़ादे को फ़क़त एक पैग नहीं देने की क़ीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी थी. उस वारदात को हुए 17 साल गुज़र गए. तब महफिल में गोली चली थी. उसके बाद ऐसी घटनाएं होती रहीं.

बठिंडा के मौड़ मंडी इलाक़े के एक बैंक्वेट हॉल में शादी का फंक्शन था. स्टेज पर डांस चल रहा था. डांस ग्रुप की लड़कियां थिरक रही थीं. जबकि स्टेज के नीचे तमाम बाराती और दूसरे मेहमान झूम रहे थे. रंग बिरंगी रौशनी और पीछे लगी बड़ी सी स्क्रीन पर पल-पल उभरती तस्वीरें माहौल को और खुशनुमा बना रही थीं. तभी अचानक. भीड़ के बीच से एक राइफल हवा में लहराती है. फिर इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता महफ़िल में फायरिंग की आवाज़ गूंज उठती है. इसी के साथ स्टेज पर डांसर कुलविंदर कौर ज़मीन पर गिर पड़ती है.

राइफ़ल से चली गोली सीधे कुलविंदर के सिर में लगती है. इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता वो वहीं स्टेज पर गिरते हुए पहले बैठती है और पूरी तरह गिर जाती है. ये सबकुछ इतनी जल्दी होता है कि आसपास खड़े लोगों तक को अहसास नहीं होता कि अभी-अभी किसी को गोली लगी है. यहां तक कि डांसर को गोली लगने के चंद सेकेंड बाद तक भी कुछ लोग वहां थिरक रहे हैं. लेकिन फिर जैसे ही लोगों की नज़र ज़मीन पर गिरी कुलविंदर पर पड़ती है, सबके होश उड़ जाते हैं. पूरे मैरिज हॉल में सन्नाटा पसर जाता है. लोग चीखते-चिल्लाते भागने लगते हैं.

महफिल में मची इस अफ़रातफ़री का फायदा उठा कर गोली चलानेवाला शख्स राइफल समेत मौका ए वारदात से भाग निकलता है. पर कहनी अभी खत्म नहीं होती है. वहशीपन अभी बाकी थी. जिस डांसर को गोली लगी थी, पता नहीं तब उसमें कितनी जान बची थी. बची थी भी या नहीं. मगर उसे जिस तरह से स्टेज से उठाया जाता है. उठाया क्या घसीटा जाता है वो कम से इंसानियत को शर्मंदा करने वाली तस्वीर थी. पर शादी के जश्न में गोली कैसे चली? मरने वाली डांसर कौन थी? गोली चलाने वाला कौन था? उसने डांसर को गोली क्यों मारी?
क्या ये महज एक हादसा था? या फिर कहानी कुछ और है? जो डांसर अब से चंद सेकेंड पहले स्टेज पर थिरक रही थी. वही डांसर अब एक लाश बन चुकी थी. उसका बेजान जिस्म उसी स्टेज पर पड़ा था. लेकिन इसके बाद शादी के आयोजन से जुड़े लोगों ने जो कुछ किया, वो तो इंसानियत को ही शर्मसार कर गया. फायरिंग के बाद मची अफ़रातफ़री का फायदा उठा कर क़ातिल फ़रार हो चुका था. एक तो भरी महफिल में स्टेज के ऊपर फायरिंग से डांसर की मौत. ऊपर से मौत के बाद लोगों का इस डांसर या यूं कहें कि डांसर की लाश के साथ ये सितम.

वहां गोली लगने के बाद स्टेज से एक डांसर की लाश को यूं घसीट कर उठा ले जाने से इन लोगों का दिल एक बार भी नहीं पसीजा. कुछ आयोजक गोली लगने के फौरन बाद हाथ-पैरों से टांग कर कुलविंदर की लाश को कुछ ऐसे उठा ले जाते हैं, जैसा कोई जानवर के साथ भी नहीं करता. घसीटने की वजह से कुलविंदर का बेजान जिस्म ज़मीन पर घिसट रहा है. सिर सीढ़ियों पर टकरा रहा है. सिर से निकली ख़ून की धार लगातार ज़मीन को लाल कर रही है. ऊपर से लाश उठा कर ले जाते लोग गालियां भी बक रहे हैं. मौका-ए-वारदात से कातिल फरार हो चुका है

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