JRD टाटा भारत के पहले कमर्शियल पायलट थे

JRD TATAआज 29 जुलाई टाटा ग्रुप के जहांगीर रतनजी दादाभाई (जेआरडी) टाटा का जन्मदिन है। टाटा…यह नाम आज किसी पहचान का मोहताज नहीं है। एक ऐसी कंपनी जिसका दखल नमक से लेकर आई.टी. कंपनी और जगुआर लैंड रोवर जैसी लग्जरी कार तक है। यह कंपनी रातोरात इतनी बड़ी नहीं बनी। इसके पीछे जेआरडी की कड़ी मेहनत का हाथ है। जानिए जेआरडी टाटा से जुड़ी कुछ खास बातें-

देश के पहले लाइसेंसी पायलट : जेआरडी के पिता रतनजी दादाभाई टाटा पारसी थे। जेआरडी का जन्म 1904 में पेरिस में हुआ था। जेआरडी की परवरिश फ्रेंच मां और पारसी पिता के बीच हुई। उनका शुरुआती जीवन फ्रांस में बीता था। 1914 में हुए प्रथम विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने 1 साल तक सिपाही की हैसियत से फ्रांस के लिए युद्ध भी किया। उनका ताल्लुक एक ऊंचे खानदान से था। उनकी मां सुजैन आरडी टाटा कार चलाने वाली भारत की पहली महिला थीं। खुद जेआरडी देश के पहले लाइसेंसी पायलट थे। उन्हें 1929 में लाइसेंस मिला था। जेआरडी को इंडियन सिविल एविएशन का पिता भी कहा जाता है। बहुत कम लोगों को इसकी जानकारी है कि एयर इंडिया की शुरुआत जेआरडी ने ही की थी। फ्रांस में कुछ साल बिताने के बाद वह लंदन चले गए और फिर भारत आ गए। और यहां से एक बिजनेस के तौर पर टाटा का सफर शुरू हुआ।

कंपनी को पहुंचाया ऊंचाईयों तक : 1938 में 34 साल की उम्र में ही उन्होंने अपने पिता के कारोबार की कमान संभाल ली। उनकी शानदार लीडरशिप में टाटा ने जिस कारोबारी ऊंचाई को छुआ, उसका अंदाजा आप इस आंकड़े से लगा सकते हैं। 1939 में टाटा की नेटवर्थ 62 करोड़ रुपए थी जो बढ़कर 1990 में 10,000 करोड़ रुपए हो गई। आज टाटा की नेटवर्थ 104 अरब डॉलर है।

अंतिम समय : जेआरडी की मौत 29 नवंबर 1993 को गुर्दे में संक्रमण के कारण जिनेवा में हुई। उनकी मृत्यु पर भारतीय संसद उनकी स्मृति में स्थगित कर दी गई थी। उनको पेरिस में पेरे लेचसे नामक कब्रिस्तान में दफनाया गया है। कंपनियों में एच.आर. की शुरुआत उन्होंने ही की थी। आज किसी कंपनी में एचआर होना भले ही सामान्य बात है लेकिन उस वक्त यह नौकरी करने वालों के लिए क्रांति थी। जेआरडी चाहते थे कि भारत सबसे खुशहाल देश बने। हालांकि उनका यह सपना तो पूरा नहीं हो पाया लेकिन टाटा एक भरोसेमंद कंपनी जरूर बन चुकी है।

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