जब नहर में बहते दिखे नोट, न जान की परवाह, न ठंड का अहसास

naharrनहर में पानी और पानी के साथ बहता धन। धन भले काला हो, लेकिन नोटों की चमक और इन्हें पाने की होड़ के आगे न जान की परवाह रही और न ठंड का अहसास हुआ। जिसके कानों में नोट बहकर आने की बात पड़ी, दौड़ा चला आया। नहर में पानी का बहाव तेज था और ऊपर से सुबह-सुबह तापमान काफी कम। ठिठुरन को पीछे छोड़ कई बार लोग नोटों को समेटने के चक्कर में तेज बहाव में संभल नहीं पाए। संतुलन बिगड़ने से गिरे, मगर फिर उठे और आंखें नोट खोजने लगी।

छोटे-छोटे बच्चे और महिलाएं भी नहर में उतरकर नोट के लिए टकटकी लगाए थीं। लोगों के लिए पानी के साथ नोट बहकर आने की घटना सपने जैसी थी, लेकिन इस बार खुली आंखों से दिख रहा यह सपना सच था। मजदूर वर्ग व किसानों ने नहर की ओर दौड़ लगाई। बच्चों ने स्कूल की जगह नहर का रास्ता पकड़ लिया। महिलाओं ने भी चूल्हा-चौका छोड़कर नोट ढूंढने के काम को प्राथमिकता दी। मजदूर काम पर जाने के बजाय नोट बीनते रहे। जितने लोग नहर में थे, उससे कहीं ज्यादा नहर के बाहर। लोग नोट मिलते ही फोटो खींचकर सोशल मीडिया में शेयर कर रहे थे। जगह-जगह लोगों ने नहर में जाली, छन्नी लगाई। ताकि नोट आए तो फंस जाए। कुछ लोग घास के ढेर का झाड़ू बनाकर नोटों की तलाश कर रहे थे। नोट दिखते ही नहर के बाहर खड़े लोग जान की चिंता किए बिना ही कूद लगा रहे थे। लोगों के बीच छीना-झपटी तक की नौबत आई। इससे कई बार अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

मोदी जिंदाबाद के लगे नारे

नोटों के आने का सिलसिला शुरू होते ही लोगों ने मोदी जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। नोट मिलने पर खुशी मनाने वालों में अधिकांश वो लोग थे, जिनके बैंक खातों में नाममात्र रुपये रहते हैं। अब उनको भी खाते में ठीकठाक रकम जमा होने की उम्मीद दिखने लगी थी। दोपहर 12 बजे नहर में पानी बंद होने के बाद भी लोगों ने उम्मीद नहीं छोड़ी और नोट मिलने के इंतजार में डटे रहे।

नोटों को कमीशन पर बदलने वाले सक्रिय

500-1000 के नोट मिलने के साथ ही कमीशन पर इन्हें बदलने वाले भी सक्रिय हो गए। 30 से 50 फीसद कमीशन काटकर छोटे नोट देने का लालच दिया जाने लगा तो कुछ लोगों ने कमीशन देकर नोट भी बदलवा डाले। यही नहीं, नोटों के बहाने नहर की सफाई भी हो गई। लोग नहर में कूड़ा हटा-हटाकर नोट ढूंढ रहे थे। महिलाएं व बच्चे तक कूड़ा निकालकर नोट तलाशते रहे। दोपहर तक काफी कूड़ा नहर के किनारों पर पड़ा दिखा।

‘नहर में नोट बहकर आना सपने जैसा है। नोटबंदी के बाद भी मेरे पास बैंक में रुपये जमा कराने के लिए बड़े नोट नहीं थे। पहली बार मैं भी बड़े नोट लेकर बैंक जाऊंगा और खाते में जमा करूंगा।’

– प्रेम, श्रमिक, टिहरी

‘पेंट करने के लिए सुबह आठ बजे घर से निकला। नहर में नोट बहकर आने का पता लगा तो कठघरिया चौराहे पर आ गया। मुझे भी तीन हजार रुपये के 500-1000 के नोट मिले। इन्हें बदलकर घर का खर्च चलाऊंगा।’

– मुकेश, पेंटर, बचीनगर

‘मोदी के कालाधन बाहर निकालने के लिए बड़े नोट बंद करने के फैसले का असर दिखने लगा है। जल्द ही और तरीके से कालाधन लोगों के घरों से बाहर निकलेगा। जो रुपये मिले, उन्हें बैंक में जमा कराया जाएगा।’

– सुरेश, मजदूर, कठघरिया

‘दिनभर मेहनत करने के बाद तीन से चार सौ रुपये मजदूरी मिलती है। कालाधन बाहर आने से आज सुबह ही हजार रुपये का नोट मिला। कुछ लोगों ने इसे देकर छह सौ रुपये के छोटे नोट देने का आश्वासन दिया। अभी फिलहाल नोट का क्या करूंगा, इसके बारे में सोचा नहीं है। ‘

– अशोक मजदूर, पीलीभीत

‘दो घंटे नहर में रहकर साढ़े आठ हजार रुपये के पांच सौ व एक हजार के नोट मिले। इन रुपयों को सुखाने के बाद खाते में जमा कराऊंगा। इन रुपयों से घर के लिए कोई सामान जोड़ा जाएगा। मोदी सरकार द्वारा कालाधन रखने वालों पर सख्ती का असर दिख रहा है।’

– सुरेश राम, श्रमिक, दमुवाढूंगा

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