इन 7 सवालों से परेशान है शिवराज सरकार :भोपाल जेल ब्रेक और एनकाउंटर

shivrajsinghभोपाल सेंट्रल जेल से सिमी के 8 आतंकियों के भागने और फिर एनकाउंटर में उनके मारे जाने के मामले में मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार घिरती जा रही है. विपक्षी दल पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं तो मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में नोटिस जारी कर दिया है. राज्य सरकार मामले की लीपापोती करने में जुटी है. सीएम चौहान ने बेशक इस एनकाउंटर को लेकर किसी भी तरह की जांच कराने से साफ इंकार कर दिया है. मगर ऐसे तमाम सवाल अब भी जिंदा हैं जिनके जवाब नहीं मिले तो इस घटना को लेकर तमाम शक बने रहेंगे.

1. भोपाल जेल की क्षमता 1500 कैदियों की है लेकिन इस समय जेल में करीब 3500 कैदी बंद हैं. सूबे के पूर्व डीजी ने भोपाल जेल की सुरक्षा को भगवान भरोसे बताया था. बावजूद इसके राज्य सरकार ने जेल की सुरक्षा को लेकर जरूरी कदम क्यों नहीं उठाए? जेल प्रशासन ने सिमी आतंकियों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की थी. लेकिन प्रदेश सरकार ने अफसरों की चिट्ठी को नजरअंदाज क्यों किया?

2. भोपाल जेल में बंद सिमी के आतंकियों की निगरानी के लिए लगे चारों सीसीटीवी कैमरे खराब निकले हैं. जबकि पूरे जेल परिसर में 42 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. बताया जा रहा है कि ये चार कैमरे करीब डेढ़ महीने से बंद पड़े हैं जो सिमी के 8 आतंकियों पर नजर रखने के लिए लगाए गए थे. अब जेल प्रशासन ने इन सीसीटीवी कैमरों की मरम्मत शुरू कराई है.

3. एनकाउंटर में मारे गए आतंकियों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गई है. इसके मुताबिक मारे गए आतंकियों की कमर से ऊपर चोट के निशान मिले हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर एनकाउंटर दूर से हुआ था तो फिर गोलियां शरीर के बाकी हिस्सों या कमरे के निचले हिस्सों पर क्यों नहीं लगी? तस्वीरों में साफ है कि पहाड़ी पर आठों निहत्थे खड़े थे. फिर उन्हें जिंदा पकड़ने की कोशिश क्यों नहीं की गई?

4. बताया जाता है कि आतंकी आधी रात के आसपास जेल से भागे थे. जेल के बाहर आने पर इन आतंकियों की किसी ने मदद भी की क्योंकि इनके कपड़े बदले हुए थे और इनके पास हथि‍यार भी थे. जेल से भागने के 8 घंटे के भीतर ये आतंकी मुठभेड़ में मारे गए. जिस जगह पर ये आतंकी मारे गए, वो जगह भोपाल जेल से 10 किलोमीटर की दूरी पर है. ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि जब इन आतंकियों का कोई मददगार भी था तो भी ये 8 घंटे में 10 किलोमीटर से ज्यादा दूर क्यों नहीं भाग पाए? अगर उन्हें हथियार देने कोई जेल के बाहर आया था तो फिर उसने भागने के लिए गाड़ी क्यों नहीं दी? जबकि पैदल भागने में पकड़े जाने का ज्यादा खतरा था? जेल तोड़ने के बाद आठों आतंकी एक साथ एक ही रास्ते पर क्यों भागे? जबकि इसमें पकड़े जाने का सबसे ज्यादा खतरा था?

5. जेल से भागने के बाद उनके पास चार कट्टे कहां से आए? जेल के बाहर उन्हें कट्टे किसने दिए? पुलिस का दावा है कि आठों विचाराधीन आतंकवादी भी गोलियां चला रहे थे. ऐसी सूरत में गोलियों से बचने की बजाए पुलिस वाले फोन पर वीडियो कैसे शूट कर रहे थे?

6. आमतौर पर जेल के अंदर 70 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती रहती है. जेल मैनुअल को ताक पर रख कर और जेल की सुरक्षा को खतरे में डाल कर दीवाली की रात जेल के 30 स्टाफ भी दीवाली मना रहे थे. यानी दीवाली की रात भोपाल सेंट्रल जेल में 70 की बजाए सिर्फ 40 स्टाफ ड्यूटी पर थे. और ये बात जेल के ज्यादातर कैदियों को पता थी. जेल के 30 स्टाफ को एक साथ छुट्टी क्यों दे दी गई? हेड कांस्टेबल की हत्या की खबर मिलने पर भी बाकी सुरक्षा गार्ड ने अलार्म या सिटी बजा कर बाकी को अलर्ट क्यों नहीं किया?

7. एनकाउंटर के दौरान तीन पुलिसवालों को चाकू से जख्म कैसे आए, जबकि वहां गोलियां चल रही थीं? एनकाउंटर के दौरान घायल हुए उन तीनों पुलिस वालों को छुपा कर क्यों रखा जा रहा है? उन्हें सामने क्यों नहीं लाया गया? पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने धारदार हथियार से हमला किया था. मगर तस्वीरें दिखा रही हैं कि हथियार बिल्कुल साफ और चमचमाता हुआ है. उसपर खून का कोई धब्बा नहीं है.

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