उत्तरी भारत में हेपेटाइटिस सी के सबसे ज़्यादा मामले पाए गए

Hepatitis C Virusएसआरएल के विश्लेषण के अनुसार हेपेटाइटिस सी का संक्रमण उत्तरी भारत में सबसे ज़्यादा पाया जाता है।

  • आंकड़ों की यह रिपोर्ट हेपेटाइटिस की जांच हेतु लिए गए 8 लाख सैम्पल्स पर आधारित हैं
  • उत्तरी भारत में हेपेटाइटिस सी के सबसे ज़्यादा मामले पाए गए।
  • वायरल हेपेटाइटिस दुनिया भर में हर साल 1.4 मिलियन लोगों की जान ले लेता है।

नई दिल्ली। भारत की अग्रणी डायग्नॉस्टिक चेन एसआरएल डायग्नॉस्टिक्स द्वारा वायरल हेपेटाईटिस (ए, बी, सी, ई) पर किए एक विश्लेषण में पाया गया है कि हेपेटाईटिस सी वायरस का संक्रमण देश के अन्य हिस्सों की तुलना में उत्तरी राज्यों में अधिक पाया जाता है। हालांकि पानी से होने वाला हेपेटाइटिस ई वायरस संक्रमण- भारत में निदान किया जाने वाला सबसे आम वायरल हेपेटाइटिस है, ये आंकड़े जनवरी 2014 से मई 2017 के बीच एसआरएल लैब्स द्वारा देश भर में किए गए 8 लाख 11 हज़ार परीक्षणों का परिणाम हैं।

हेपेटाइटिस सी वायरस (HCV) एक्यूट एवं क्रोनिक (तीव्र एवं गम्भीर) दोनों प्रकार के हेपेटाइटिस का कारण हो सकता है, जो हल्की बीमारी से लेकर गम्भीर आजीवन बीमारी के लक्षणों का कारण भी बन सकता है। हालांकि हेपेटाइटिस सी वायरस से संक्रमित 80 से 85 फीसदी व्यक्ति क्रोनिक हेपेटाइटिस का शिकार हो जाते हैं, जिन्हें आजीवन दवाओं पर ही रहना पड़ता है। हेपेटाइटिस सी वायरस खून में पैदा होने और बढ़ने वाला वायरस है, खून की थोड़ी सी मात्रा से आसानी फैल सकता है जैसे इन्जेक्शन के माध्यम से दवा देना, इंजेक्शन लगाने की असुरक्षित प्रथाओं का इस्तेमाल, असुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं और बिना जांच के रक्त एवं रक्त उत्पादों का आधान या संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन सम्बन्ध। दुनिया भर में हेपेटाइटिस सी के प्रसार की अनुमानित दर 1 फीसदी है जिसमें 71 मिलियन व्यस्क इस वायरस से संक्रमित हैं। रोग के शिकार मरीज़ ज़्यादातर सिरहोसिस या यकृत कैंसर का शिकार हो जाते हैं। हर साल तकरीबन 399,000 लोगों की मृत्यु हेपेटाइटिस सी के कारण हो जाती है, इसका मुख्य कारण सिरोसिस या हेपेटोसैल्युलर कार्सिनोमा होता है।

अध्ययन में पाया गया है कि चारों प्रकार का वायरल हेपेटाइटिस 16-30 एवं 31-45 आयु वर्ग में सबसे आम है। पानी से होने वाला संक्रमण हेपेटाइटिस ई एवं हेपेटाइटिस ए वायरस संक्रमण विशेष रूप से 16-30 आयु वर्ग में पाया जाता है जबकि हेपेटाइटिस सी वायरस का संक्रमण 46-60 एवं 61-85 आयु वर्ग में पाया जाता है। एचबीवी संक्रमण सभी आयु र्गों में समान रूप से पाया जाता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर साल 6-10 मिलियन नए संक्रमण के मामले दर्ज किए जाते हैं। ग्लोबल हेल्थ सेक्टर स्टै्रटेजी ऑन वायरल हेपेटाइटिस रिपोर्ट के अनुसार हर साल 1.4 मिलियन लोगों की मृत्यु  वायरल हेपेटाइटिस तथा इसके कारण होने वाले कैंसर या सिरहोसिस से हो जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार 48 फीसदी मामले हेपेटाइटिस सी के होते हैं, 47 फीसदी मामले हेपेटाइटिस बी के तथा शेष हेपेटाइटिस ए और हेपेटाइटिस ई के कारण 1.4 मिलियन लोग मौत का शिकार हो जाते हैं। दुनिया भर में लगग 257 मिलियन लोग क्रोनिक हेपेटाइटिस बी वायरस संक्रमण से पीड़ित हैं।

इस मौके पर एसआरएल डायग्नॉस्टिक्स से डॉ अविनाश फड़के, प्रेज़ीडेन्ट टेकनोलॉजी एवं मेंटर (क्लिनिकल पेथोलोजी) ने कहा, ‘‘दुनिया भर में 400 मिलियन लोग इस रोग का शिकार हैं, बावजूद इसके हेपेटाइटिस की उपेक्षा की जा रही है। वायरल हेपेटाइटिस के चार प्रकार ए, बी, सी, ई विभिन्न प्रकार के लोगों को प्रभावित करते हैं, विभिन्न प्रकारों से प्रसारित होते हें और विभिन्न लक्षणों का कारण बनते हैं। समय के साथ भारत की शहरी आबादी की जीवनशैली में बड़े बदलाव आए हैं। एचईवी और एचएवी संक्रमण की बात करें तो हाइजीन और साफ-सफाई इसमें मुख्य भूमिका निभाती है। वहीं एचबीवी और एचसीवी के मामलों में जीवनशैली और जागरुकता बेहद महत्वपूर्ण है।’’

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