गोल्‍ड कोस्‍ट में गुरुराजा ने भारत के लिए जीता पहला मेडल

Gururajaएक ट्रक ड्राइवर के बेटे पी गुरुराजा ने कॉमनवेल्‍थ खेलों में भारत को पहला पदक दिलाया।

भारत के लिए कॉमनवेल्‍थ खेलों में पदकों का खाता गुरूराजा ने वेटलिफिटिंग में सिल्‍वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। गुरूराजा ने 56 किलोग्राम भार वर्ग में यह पदक जीता है। गुरुराज ने स्‍नैच में 111 का स्‍कोर किया तो वहीं क्‍लीन एंड जर्क में 138 का स्‍कोर किया। उन्‍होंने कुल 249 का स्‍कोर करते हुए पदक अपने नाम किया।

गुरुराजा कर्नाटक के एक छोटे से कस्बे कुंडूपारा से आए 25 साल के गुरुराजा ट्रक ड्राइवर के बेटे हैं. उन्होंने 2010 में वेटलिफ्टिंग करियर शुरू किया था. पैसों की तंगी का यह हाल था कि एक भारत्तोलक की खुराक की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त पैसने नहीं होते थे.  ऐसे में उनके पिता ने हमेशा ही उनका हौसला बढ़ाया. उनके परिवार में दस लोग हैं. गुरुराजा के मुताबिक धीरे-धीरे हालात बेहतर होते गए.

P Gururajaक्लीन और जर्क के पहले दो प्रयास में विफल होने वाले गुरूराजा ने कहा, ‘‘ जब मैं पहले दो प्रयास में विफल रहा था तब मेरे कोच ने मुझे समझाया कि मेरे लिए जीवन का काफी कुछ इस प्रयास पर निर्भर करता है. मैंने अपने परिवार और देश को याद किया.

भारतीय वायुसेना के निचली श्रेणी के कर्मचारी गुरूराजा ने देश के पिछड़े क्षेत्रों में आने वाली जीवन की सारी समस्याओं को देखा है. उन्होंने आठ भाई-बहन के परिवार का भरणपोषण करने वाले अपने ट्रक चालक पिता को काफी मेहनत करते हुए देखा है.  गुरूराजा पहलवान बनना चाहते थे लेकिन कोच की पैनी नजरों ने उनमें भारोत्तोलन की प्रतिभा देखी और इस खेल में पदार्पण कराया.

गुरुराजा ने कहा, ‘‘ मुझे याद हैं, जब मैंने सुशील कुमार को 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में देखा था, तब मैने भारोत्तोलन शुरू किया था. जब मैंने उन्हें देखा था तब मैं पहलवान बनना चाहता था. तभी मैं अपने कोच राजेन्द्र प्रसाद से मिला जिन्होंने मुझे भारोत्तोलन सिखाया.’’

उन्होंने कहा, ‘‘ मैं अभी भी कुश्ती का लुत्फ उठाता हूं . मुझे अभी भी उस खेल से काफी लगाव है. मैं ओलंपिक कि तैयारी करूंगा, राष्ट्रीय महासंघ और मेरे सफर में मेरा साथ देने वालों से मुझे काफी मदद मिली है. मेरे सभी कोचों ने करियर को संवारा है.’’

Commonwealth-Games-2018उन्होनें कहा, ‘‘ 2010 में जब मैंने भारोत्तोलन में किस्मत आजमाना शुरू किया था, प्रशिक्षण के पहले महीने में मैं काफी हताश था क्योंकि मुझे यह भी पता नहीं था कि वजन कैसे उठाया जाए यह मेरे लिए बहुत भारी था.’’

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