लड़की है मॉल का माल और राशन का सामान नहीं

girlसुश्रुत और उनके परिवार जैसी एक घटना नहीं होती. लगभग हर घर में लडकी देखने आये लोग ऐसा ही व्यवहार करते हैं. बड़े बुजुर्ग जब ऐसा व्यवहार करते हैं तो समझ में आता है लेकिन आजकल के युवा लडकी देखते वक़्त इतनी मीनमेख निकालते हैं मानो उन्हें लड़की नहीं कोई स्मार्ट फीचर वाला फोन चाहिए. जिसके एक एक स्पेसीफिकेशन चेक करना जरूरी हो. अरे भाई लड़की है कोई राशन का सामान नहीं है जो इतना मोल भाव किया जाए.

हर इंसान में कुछ न कुछ कमियाँ और खूबियाँ होती हैं. लड़का हो या लड़की. ऐसे में सिर्फ लडकी में कमी निकालना गलत है. आजकल के युवाओं को सोचना चाहिए कि लडकियां आत्मनिर्भर होकर अपना जीवन जीना चाहती हैं. आत्मसम्मान से समझौता नहीं करती हैं.

ऐसे में क्या कोई युवा चाहेगा कि उसकी होनी वाली वाइफ के साथ इस तरह की मीनमेख निकालकर शादी हो. होना तो यह चाहिए कि युवा अपनी होने वाली वाइफ के साथ अलग से बात करके अपनी पसंद- नापसंद, हौबीज, आइडियोलॉजी और जीवन में वरीयता देने वाली बातों पर चर्चा करें और जब मन मिलने लगे तब शादी के लिए हाँ करें.

सिर्फ शक्लसूरत, लम्बाई और धन संपदा जैसी भरी गुण देखकर लड़की में कमी निकालना मूर्खता है. शरीर और पैसा तो बदलता रहता है लेकिन विचार नहीं बदलते. जरा सोचिये जो युवा लड्क्यों को शादी के दौरान इतना मीन मेख निकालकर लड़की को शर्मिंदा करते हैं, अगर उनकी बहन को देखने आये लड़के वाले भी ऐसी ही हरकत करें तो कितना बुरा लगेगा. जाहिर है सबकी भावना और आत्मसमान का आदर करना चाहिए.

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