घर खरीदना है तो जल्द आएंगे अच्छे दिन , नोट बैन से प्रॉपर्टी सस्ती!

homeloan500 और 1000 के नोट बैन हो जाने से लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जानकारों के मुताबिक नोट बदलने और ATM की स्थिति सामान्य होने में अभी करीब 15 दिन लग जाएंगे। हालांकि आपको बता दें कि इससे अर्थव्यवस्था को नुकसान नहीं कई ज़रूरी फायदे होने जा रहे हैं। सबसे पहली बात इस बैन के बाद लोग बैंकों में पैसे जमा करा रहे हैं जिससे कैश फ्लो बढ़ेगा और कर्ज भी सस्ता होगा जिसका सीधा असर महंगाई दर में कमी के रूप में देखा जाएगा।

30% तक सस्ती हो सकती है प्रॉपर्टी
एक्सपर्ट्स के मुताबिक कैश फ्लो बढ़ने से कर्ज का सस्ता होना तय है जिससे होम लोन भी सस्ता होने के पूरे आसार हैं। आंकड़ों के मुताबिक फिलहाल देश की जीडीपी में रियल्टी सेक्टर का शेयर 11% है। अक्सर प्रॉपर्टी सौदों में टैक्स बचाने के लिए बड़ा लेनदेन नगद होता है। वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में एक तिहाई काला धन सिर्फ प्रॉपर्टी बाजार में है। अब नोटबंदी के बाद से ये नकद मार्केट 20% से 30% नीचे जाना तय है। इसके बाद कैश फ्लो को सुधरने में करीब 6 महीने का वक़्त लग जाएगा।

बता दें कि शुरूआत में इसका रियलिटी सेक्टर निगेटिव असर पड़ेगा। बता दें कि नोट बैन होने के बाद अब इस सेक्टर में कालाधन खपाने वाले यहां से दूर होने लगेंगे। अनुमान के मुताबिक ब्लैकमनी के जरिये इन्वेस्टमेंट के लिए 40% महंगे मकानों की बिक्री होती है। इससे रियलटी सेक्टर में घाटा दूर होगा और मकानों की कीमतें गिरेंगी। इसका असर अभी से शेयर मार्केट पर दिखाई दे रहा है और रियलटी सेक्टर के शेयरों में 20% तक की गिरावट देखी जा रही है। रियल एस्टेट सेक्टर के गिरने के बाद बैंक होम लोन को साढ़े आठ फीसदी तक कर सकते हैं। सरकार भी इस दिशा में कुछ कदम उठा सकती है और डाउन पेमेंट की सीमा को 10-15% से और कम किया जा सकता है।

इसके आलावा जब कालाधन इन्वेस्ट करने वाले इस सेक्टर से बाहर हो जाएंगे। इससे असली खरीदार और वाइट मनी मार्केट में आने लगेगी। अभी बिल्डर्स कीमत लोकेशन के हिसाब से तय करते थे लेकिन नोट बैन के बाद ये सब बदलने वाला है। मार्केट गिरेगा तो आने वाले वक्त में बिल्डर्स की तरफ से भी डिस्काउंट बढ़ाए जाने की उम्मीद की जा रही है। ब्लैकमनी कम होने से स्टांप ड्यूटी की चोरी रुकेगी। बता दें कि फिलहाल ज्यादातर लोग बिल्डर्स के साथ मिलकर 30 लाख के मकान को 20 लाख का बताकर रजिस्ट्री कराते हैं और बाकी के 10 लाख रुपए कैश में दे देते हैं। जिन्होंने ब्लैक में पैसा देकर कम पैसों की रजिस्ट्री कराई थी अब उनका मकान उसी कीमत में बिकेगा जितने की उसने रजिस्ट्री कराई है।

सबसे पहले बता दें कि कैश की किल्लत से टीवी-फ्रिज आदि की बिक्री घटने की आशंका है। सरकार का मानना है कि एनजीओ ब्लैक मनी को व्हाइट बनाने का बड़ा जरिया हैं इसलिए इन्हीं ओपर एजेंसियों की कड़ी नज़र है। इसके लावा नकद फीस लेने वाले डॉक्टर और दूसरे प्रोफेशनल्स पर भी रोक लगा दी जाएगी। हालांकि इसके बावजूद भी बेनामी खातों से पैसे वापस आने की संभावना बेहद कम है। इसके बाद खर्चीली शादियां, चुनावों में अनाप-शनाप पैसे बहाने की परंपरा थम सकती है। ब्लैक मनी के दूसरे रास्ता भी निकलेंगे। आशंका है कि डोनेशन के नाम पर कॉलेजों की सीटें भी गोल्ड में बिकेंगी।

दान-धर्म पर भी नज़र
दान या धार्मिक कार्य वो इलाका है जहां पर लोग बतौर दान काले धन का इस्तेमाल करते हैं। अब अगर कोई भी व्यक्ति धार्मिक कार्यों पर बड़ी राशि खर्च करता है या किसी संस्था इत्यादि को दान करता है, तो उसे इसका पूरा हिसाब-किताब देना पड़ेगा। ऐसे में दान-धर्म पर होने वाले खर्चों में कमी तो जरूर आएगी। लेकिन हो सकता है सरकार बजट में धर्मार्थ या समाज के कल्याण के लिए खर्च होने वाली राशि पर टैक्स छूट बढ़ा दे।

बता दें कि नोट बैन करने से छोटे सुनारों का पैसा फंस गया है जिसके बाद काफी लोगों ने अपनी दुकानें तक बंद कर दी हैं। सबसे ज्यादा मुश्किल में छोटे सुनार हैं क्योंकि वेडिंग सीजन में इन्होंने कई रेग्युलर कस्टमर्स को उधार में गहने दिए थे। अब ये कस्टमर 1000 और 500 के पुराने नोट में पेमेंट करने पहुंच रहे हैं। ग्राहकों के पास पैसे तो हैं लेकिन नए नोट नहीं हैं। ऐसे में कई सुनारों ने दुकानें भी बंद कर दी हैं।

नेपाल में भी बैन हुए नोट
भारत के 500 और 1000 के नोटों को अमान्य करने के फैसले का नेपाल में भी व्यापक असर हुआ है। नेपाल की बैंकिंग व्यवस्था ने भारत के 500 और 1000 के नोटों के अमान्य होने के कारण 3.5 करोड़ रुपये की भारतीय मुद्रा को जारी करने से रोक दिया है। नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता नारायण पोडेल ने कहा, ‘हमारे द्वारा लाइसेंस प्राप्त बैंकिंग संस्थाओं ने सूचना दी है कि गुरुवार से उन्होंने 3.5 करोड़ रुपये की प्रतिबंधित भारतीय मुद्रा को रोक लिया है।’

उन्होंने कहा कि अन्य बैंकों से विवरण मिलने के बाद इन प्रतिबंधित नोटों की कुल राशि बढ़कर चार करोड़ रुपये हो सकती है। नेपाल के केंद्रीय बैंक का मानना है कि भारत की सीमा से सटे क्षेत्रों में रहने वालों लोगों और व्यपारियों के साथ ही भारत से पहुंचे नेपाली प्रवासी मजदूरों के पास बड़ी मात्रा में ऐसी भारतीय मुद्रा हो सकती है। पोडेल ने कहा, ‘आम जनता के पास मौजूद भारतीय मुद्रा के बारे में हमारे पास कोई रिकॉर्ड नहीं है।’

 

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