जान लें अपने बच्चों का भविष्य-क्रिस्प में DMIT (फिंगर प्रिंट पर्सनाल्टी एनालिसिस) परीक्षण

DMITहर माँ बाप का यह स्वप्न होता हैं कि उनका बच्चा बुद्धिमान हो, व्यवहार कुषल हो और समाज में उच्च स्तर प्राप्त करने वाला बने। यह बच्चा क्या पढ़ाई करेगा, उसका  भविष्य कैसा होगा आदि जानकारी के प्रति हर व्यक्ति को उत्सुकता रहती है। अगर यह जानकारी बच्चे कि बाल्यावस्था में या पढ़ाई के महत्वपूर्ण पड़ाव के पहले मिल जाये तो माँ बाप इस बहुमूल्य जानकारी का सही उपयोग करके अपने बच्चे को सही मार्गदर्षन, प्रोत्साहन एवं योग्य क्षेत्र में षिक्षा दिलाने का अच्छा प्रबंध करके उनके उत्तम भविष्य निर्माण में सहयोग कर सकते है।

क्रिस्प के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकेश शर्मा  ने बताया कि “सैन्टर फॉर रिसर्च एण्ड इण्डस्ट्रियल स्टॉफ परफॉरमैन्स (क्रिस्प) भोपाल एक ऐसी संस्था है जो इस डर्मेटोलाइजिक मल्टीपल इंटेलीजेंस एनालिसिस DMIT या फिंगर प्रिंट पर्सनालटी एनालिसस परिक्षण से किसी भी व्यक्ति, बच्चे या बडों के व्यक्तित्व के बारे में सही जानकारी एवं उपयुक्त परामर्ष देती है। इस वैज्ञानिक परिक्षण से किसी भी व्यक्ति की विभिन्न प्रकार की बुद्धियों की जानकारी प्राप्त करके उसमें क्या अच्छाईयाँ वा कमियां हैं, उसका स्वभाव, व्यवहार, पठन की रूचि, याद करने की क्षमता आदि कई पहलूओं को जाना जा सकता है व व्यक्ति के लक्ष्य प्राप्ति की दिषा में उपयुक्त कार्यवाही की जा सकती है।”

क्रिस्प में DMIT के परीक्षण करवाने वाले प्रतिभागियों की कहानी उनकी जुबानी:

DMIT (फिंगर प्रिंट पर्सनाल्टी एनालिसिस ) कराने का निर्णय मेरे जीवन और कैरियर के लिये बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय साबित हुआ है। DMITके बारे में मुझे मेरे कजिन से पता चला। जब मेरे कजिन ने मुझे बताया कि अंगुलियों के निषान से हमारे व्यक्तित्व कैरियर, सीखने के पैर्टन आदि का पता चलता है जो कि जन्मजात होती है तो पहले तो मैनंे यकीन ही नही किया, लेकिन जब कजिन में DMIT के बाद अपने कैरियर को लेकर जो बढ़ा हुआ विष्वास देखा तब मैनें खुद भी DMIT करवाने के विषय में सोचा। मैं धन्यवाद कहना चाहुॅगा क्रिस्प कि वो DMIT के द्वारा हमें हमारी जन्मजात काबिलियत जानने में मदद करता है। DMITके बाद मैने अपने कैरियर को लेकर अलग सा आत्मविष्वास और साकारात्मकता को महसूस किया है। एक बार फिर से धन्यवाद क्रिस्प।

(अनुज चतुर्वेदी)

पार्थ मेरा इकलौता बेटा है जो डी.पी.एस, भोपाल का 11जी का छात्र है और सिंगल पैरेन्ट होने के नाते पार्थ की सारी जिम्मेदारी मेरी है। मैं इसके कैरियर  को लेकर काफी चिंतित थी। मेरी सहेली ने अपने बेटे का DMIT क्रिस्प से करवाया है जिसमें उसके बेटे को 11जी  कक्षा में बारेे चयन करने में काफी मदद मिली। तब मैने भी क्रिस्प से पार्थ का DMIT करवाया। यकीन मानिये विषय चयन  के साथ साथ DMIT रिर्पोट् से मुझे पार्थ के विषय में और भी बहुत सारी महत्वपूर्ण जानकारी जानने को मिली। अब मुझे लगता है कि जब भी मुझे पार्थ के लिये कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लेना होगा तो यह DMIT लाईफ टाइम रिर्पोट मुझे जरूर मेरी मदद करेगी।

(श्रीमती पुष्पा पवार)

मैं रवि षर्मा, मैने अपने दोनो बच्चों का क्रिस्प  भोपाल से  DMIT  करवाया है। बेटी 11जी  में है और बेटा 6जी  कक्षा में केन्द्रीय विद्यालय भोपाल में है। क्रिस्प DMIT के बारे में मुझे ऑफिस में मेरे एक मित्र ने बताया था। उत्सुकतावष जब हम क्रिस्प  गये तो वहॉ  के बिषेषज्ञों से DMIT के बारे मे विस्तार से जान के काफी आष्चर्य के साथ-साथ बच्चों के जन्मजात गुण जानने की उत्सुकता भी हुई। हालाँकी मेरे दोनो बच्चे पढाई में बहुत अच्छे है किन्तु एक पिता होने के नाते अच्छे को बहुत अच्छे में कैसे बदला जा सकता है यह जानने के लिये मैने अपने दोनो बच्चो का DMIT करवाया। रिर्पोट में काफी कुछ वैसा ही निकला जैसा में चाहता था। इस रिर्पोट के माध्यम में अब मैं अपने बच्चो की परवरिष और बैहतर तरीके से कर पाऊॅगा।

 (रवि शर्मा)

हमने हमारे बेटे का DMIT इसलिये करवाया, क्योकि वो पढाई में ध्यान नही दे रहा था। उत्कर्ष 12जी  गणित विषय से पास कर के इन्जीनियरिंग के लिये तैयारी कर रहा है। जब उसके कोचिंग के सर से इस बारे में बात की तो उन्होने बताया की उत्कर्ष बुद्धिमान बालक है और वह कर सकता है, किन्तु वह पूरा ध्यान नही दे पाता है। तब हमने DMIT करवाया जिसकी रिपोर्ट से हमें पता चला कि उत्कर्ष सुन कर और कर के चीजों को जल्दी सीखता है। इस रिर्पोट ने हमारी ऑखे खोल दी। अब हम उत्कर्ष को पढने के लिये बार बार नही बोलते, जबकि कोषिष करते है कि जिस तरीक से उसे जल्दी और ज्यादा याद होता है वो वैसा करे। परिणाम में हमें काफी हद तक फर्क देखने को मिल रहा है। अब वो अपनी सीखने की क्षमता जान के ज्यादा खुष रहता है। परीक्षा में ज्यादा अंक भी हासिल कर रहा है। हम षुक्रगुजार है क्रिस्प DMIT  केे कि उसने हमें और हमारे बेटे को रोज रोज की पढो पढो की समस्या से मुक्ति दिला दी है। हमारे संबध भी खुषगवार कर दिये है। षुक्रिया क्रिस्प।

(श्रीमती और श्री नीरेन्द्र सिंह) 

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