हेल्थ इंश्योरेंस के बारे हर वो बात जो आपको जाननी चाहिए

insurenseहेल्थ इंष्योरेंस यानी स्वास्थ्य बीमा को मेडिक्लेम भी कह सकते हैं. देष की आबादी का एक बड़ा हिस्सा खासकर ग्रामीण हिस्सा तो हेल्थ इंष्योरेंस के मायनों से वाकिफ तक नहीं है. आसान लहजे में समझें तो हेल्थ इंष्योरेंस दो तरह का होता है. पहला इंडिविजुअल हेल्थ इंश्योरेंस यानी  व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा और दूसरा फैमिली फ्लोटर बीमा यानी सामूहिक बीमा. इंडिविजुअल हेल्थ इंश्योरेंस के कवर क्षेत्र में सिर्फ बीमा स्वामी आता है. इस बीमा का षुल्क सामूहिक बीमा शुल्क की तुलना में अधिक होता है.

जबकि फ्लोटर प्लान में बीमा करने वाला या प्रायोजक ही पौलिसी का स्वामी होता है और दूसरे पंजीकृत सदस्य भी पौलिसी में संलग्न होते हैं. उदाहरण के तौर पर अगर पिता ने अपने हेल्थ इंष्योरेंस के प्लान में पत्नी और बच्चों को पंजीकृत कराया है तो जरूरत पड़ने पर उन को भी कवर किया जाता है. आमतौर पर फैमिली फ्लोटर प्लान को लोग तरजीह देते हैं.

भारत में आजकई बीमा कंपनियां हैं जो अच्छी और सुलभ हेल्थ इंष्योरेंस पौलिसी मुहैयया कराती हैं. हाल ही पंजाब नेषनल बैंक ने इस क्षेत्र में बढती आर्थिक संभावनाओं के चलते मेट लाइफ के साथ करार किया है. इसी तरह आईसीआईसीआई बैंक ने भी लोम्बार्ड कंपनी के साथ हेल्थ इंष्योरेंस के क्षेत्र में करार किया है.

यों तो सभी बीमा कंपनी बेहतर सुविधाओं और क्लेम का दावा करती हैं और देती भी हैं पर बीमा के मामाले में सबसे जरूरी बात यही होती है कि हम उससे जुड़े सभी नियमों, षर्तों को भलीभांति समझ लें. कुछ गंभीर रोगों के लिए बीमा कंपनिया कवर नहीं देती इसलिए यह अवश्य पता कर लेना चाहिये कि किन बीमारियों का बीमा होता है और किनका नहीं.

बाजार में कई तरह की हेल्थ इंष्योरेंस पौलिसी मौजूद हैं. सब कंपनियां प्रतिस्पर्धा के चलते कम राषि और बेहतरीन सुविधाओं से लैस आकर्शक प्लान दे रहीं हैं.उम्र और बीमारियों के आधार पर सबके लिए अलग अलग पौलिसी मुफीद हो सकती है.

बाजार में मौजूदा कुछ हेल्थ प्लान की बात करें तो आईसीआईसीआई लोंबार्ड जनरल की कंप्लीट हेल्थ इंश्योरेंस, हेल्थ केयर प्लस, हेल्थ एडवांटेज प्लस, पर्सनल प्रोटेक्ट, क्रिटिकल केयर पौलिसी के अलावा अवीवा का अवीवा हेल्थ सिक्योर और आई लाइफ, बजाज अलायंज की इंडीविजुअल हेल्थ गार्ड,फैमिली फ्लोटर हेल्थ गार्ड व एक्स्ट्रा केयर, एगौन रेलीगेर का आई हेल्थ प्लान, कौम्प्रिहेंसिव हेल्थ प्लान आदि प्रमुख हैं.

कई नियम होते हैं
इन ढेरों प्लान के तहत हर बीमा कंपनी की अलग अलग क्लेम राषि, प्रीमियम, सेवाएं, सुविधाएं और प्रोसेसिंग हैं. उदाहरण के तौर पर आईसीआईसीआई लोंबार्ड जनरल की कंपनलीट हेल्थ पौलिसी में 10 लाख तक का कवर मिलता है. इसके अंतर्गत 46 साल से कम उम्र वाले बीमा ग्राहक को मेडिकल टेस्ट की कोई जरूरत नहीं होती.

अगर बात उम्र की करें तो इसे कोई भी ले सकता है. फिर भी कागजी तौर पर फैमिली फ्लोटर पौलिसी के लिए 3 महीने और इंडीविजुअल प्लान के लिए 6 साल है. इसके अलावा प्लान में पौलिसी लागू होने के 30दिनों के अंदर किसी बीमारी पर क्लेम की सुविधा नहीं हैं सिवाए एक्सीडेंट की घटना के. इसी तरह क्लेम को लेकर और भी कई नियम होते हैं जो बीमा एजेंट पौलिसी देने से पहले ग्राहकों को बताते हैं.

इसी कंपनी का एक और प्लान हेल्थ एडवांटेज प्लस ओपीडी के खर्च भी कवर करता है जबकि अन्य कई कंपनियां ऐसा नहीं करती. प्लान में 40 हजार से ज्यादा अस्पतालों का भारत भर में नेटवर्क हैं. आप अपने सुविधा से नजदीकी अस्पताल चुन सकते हैं. कुछ हेल्थ इंष्योरेंस कंपनियां गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर या हृदय संबंधी रोग से पीड़ित होने पर एक बार लाभ देते हैं. इसे एड औन हेल्थ कवर कहते हैं.

आईसीआईसीआई लोंबार्ड के अलावा इंडस इंड बैंक भी हेल्थ इंष्योंरेस देता है. यह अपनी विभिन्न हेल्थ पौलिसी के तहत भारत के 2200 से भी अधिक अस्पतालों में बिना नकदी दिए भर्ती रहने की सुविधा प्रदान करता है. यह भर्ती होने से पहले और अस्पताल से घर जाने के बाद के उपचार के दौरान हुए खर्च को भी भरता है. इनका दावा है कि चिकित्सा व्ययों का अस्पताल से निवृत्ति के 90 दिन तक भुगतान भी बीमा के तहत होता है.

भारत की कोई भी अन्य हेल्थ इंष्योरेंस पौलिसी इस सुविधा की बराबरी नहीं करती. ऐसी कई कंपनी हैं जो अलगअलग राषि के हेल्थ इंष्यारेंस पर कई लुभावनी सुविधाएं देती है. स्वास्थ्य बीमा कंपनी के सभी नियम व षर्तों का विवरिण यहां संभव नहीं. इसलिए जब भी स्वास्थ्य बीमा लें अपने बीमा फार्म को तसल्ली से पढें और एजेंट से सभी षंकाओं का समाधान कराएं.

बीमारी, सुविधाएं और कवर

आमतौर पर 45 साल से कम उम्र के हैं तो पॉलिसी लेने से पहले किसी मेडिकल चेकअप की जरूरत नहीं होती. कुछ कंपनियों में यह उम्र 60 साल भी है. सामान्यत रक्तचाप, डाबिटीज,एसजीपीटी, कौलेस्ट्रोल, यूरीन रुटीन, ईसीजी, चेस्ट का एक्सरे, मोतियाबिंद और ग्लूकोमा आदि का मैडिकल टेस्ट करवाना पड़ता है. कुछ बीमारियां  मसलन एचआईवी, मनोरोग आदि कभी कवर नहीं होते.

कुछ में प्लान ऐम्बुलेंस खर्च, हौस्पिटल का रोजाना का खर्च आदि भी कवर होते हैं. हालांकि मैटरनिटी का खर्च आमतौर पर कवर नहीं होता, लेकिन मैक्स बूपा और अपोलो म्यूनिख जैसी कुछ कंपनियां कुछ सीमा और शर्तों के साथ यह कवर दे देती हैं. हालांकि डाक्टर अग्रवाल का मनाना है कि ओपीडी भी इंष्योरेंस के दायरे में आना चाहिए. इसके अलावा इंष्योरेंस के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होनी चाहिए और स्वास्थ्य बीमा जीवनपर्यंत चलना चाहिए.

गौरतलब है कि अब हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में पोर्टेबिलिटी लागू हो चुकी है. इसलिए जब बीमा कंपनी पौलिसी के रिन्यूअल के दौरान प्रीमियम बढाए तो आप कंपनी बदल सकते हैं. हेल्थ इंष्योरेंस पर टैक्स में भी छूट मिलती है. इसके अलावा समय और धन की बचत के लिए औनलाइन हैल्थ पौलिसी खरीदना एचित रहता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.