इच्छामृत्यु कानून – अपनी जान लेने के लिए सरकार से इजाजत क्यों?

Euthansiaब्रिटेन, स्पेन, फ्रांस और इटली जैसे यूरोपीय देशों सहित दुनिया के ज़्यादातर देशों में इच्छा मृत्यु ग़ैर-क़ानूनी है. भारत में भले ही इच्छा मृत्यु गैर्कानोंई मानी जाती हो लकिन कोलंबिया समेत दुनिया में कई मुल्क ऐसे भी हैं जहाँ इच्छा मृत्यु को सरकार ने कानोंनी जामा पहन रखा है. बीते माह लैटिन अमेरिकी देश कोलंबिया में पहली बार कैंसर की पीड़ा सह रहे 73 साल के बुजुर्ग को इच्छामृत्यु दी गई। यह इस देश में अपनी तरह का पहला मामला था. दरअसल ओविडियो गोंसालिस को पांच साल से मुंह के कैंसर था।

लिहाजा उन्हें मौत का इंजेक्शन लगाया गया। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा बीमारी के आखिरी चरण में पहुंचे लोगों को मृत्यु देने के फैसले के बाद यह इस तरह की पहली मौत है। हाल में सरकार ने इच्छामृत्यु कानून का एक मसविदा तैयार कर उसे स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट पर डाला है और इस बारे में आम जनता और विशेषज्ञों की राय जानने की प्रक्रिया शुरू की है। खुद सरकार ऐसे कानून के दुरुपयोग की आशंका में इसके विरोध में रही है।

लेकिन, यह भी सच है कि अपने देश और समाज में लंबे अरसे से इच्छामृत्यु को कानूनी अधिकार दिए जाने की मांग भी उठती रही है। अमरीका- यहां सक्रिय इच्छा मृत्यु ग़ैर-क़ानूनी है लेकिन ओरेगन, वॉशिंगटन और मोंटाना राज्यों में डॉक्टर की सलाह और उसकी मदद से मरने की इजाज़त है. स्विट्ज़रलैंड- यहां ख़ुद से ज़हरीली सुई लेकर आत्महत्या करने की इजाज़त है,

हालांकि इच्छा मृत्यु ग़ैर क़ानूनी है. नीदरलैंड्स- यहां डॉक्टरों के हाथों सक्रिय इच्छा मृत्यु और मरीज की मर्ज़ी से दी जाने वाली मृत्यु पर दंडनीय अपराध नहीं है. बेल्जियम- यहां सितंबर 2002 से इच्छा मृत्यु वैधानिक हो चुकी है. कोलंबिया -दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों में शुमार है, जहां इच्छामृत्यु की इजाजत है।

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