आर्थिक सर्वे 2017-18 

Arun-Jaitleyक्या देश नोटबंदी के असर से बाहर निकल चुका है? क्या हमारा देश संरक्षणवाद के दौर में भी निर्यात के क्षेत्र में प्रगति करेगा? इन सबसे भी बड़ा सवाल कि क्या आर्थिक विकास के हाइवे पर भारत की रफ्तार आगे भी बढ़ती रहेगी? नीचे देखिए,

  • वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में इकनॉमिक सर्वे पेश किया। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि अगले वित्त वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की किसी अन्य अर्थव्यवस्था के मुकाबले तेजी से वृद्धि करेगी।
  • आर्थिक सर्वेक्षण में वित्त वर्ष 2017-18 के लिए 6.75% से 7.5% की दर से आर्थिक वृद्धि का अनुमान जताया गया है। वैश्विक स्तर पर मांग में उछाल से वित्त वर्ष 2017-18 में तेज आर्थिक वृद्धि होगी।
  • मौजूदा वित्त वर्ष 2016-17 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर घटकर 6.5 प्रतिशत पर आएगी। पिछले वित्त वर्ष में यह 7.6 प्रतिशत रही थी। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर मौजूदा वित्त वर्ष में महंगाई औसतन 5 प्रतिशत पर ठहरी हुई है: आर्थिक सर्वे
  • सर्वे में आर्थिक गतिशीलता और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की वकालत की गई है। यूनिवर्सल बेसिक इनकम (यूबीआई) डेटा पर गंभीरता से विचार की जरूरत बताई गई है। सब्सिडी खत्म करने के विकल्प के तौर पर यूबीआई को पेश किया जा सकता है।
  • आर्थिक सर्वे में अर्थव्यवस्था के विकास की राह में तीन बड़े खतरों का जिक्र किया गया है। नोटबंदी से कृषि क्षेत्र पर कैश की कमी का असर दिखेगा। क्रूड कीमतों में उछाल जीडीपी के लिए बड़ा खतरा।
  • वित्त वर्ष 2017-18 में क्रूड में गिरावट का फायदा मिलना बंद हो जाएगा। क्रूड के दाम में उछाल की वजह से रिजर्व बैंक से रेट कट की उम्मीद खत्म हो गई।
  • इकनॉमिक सर्वे में तीन सेक्टर्स फर्टिलाइजर, सिविल एविएशन, बैंकिंग के निजीकरण की जरूरत बताई गई। सरकार ने सिफारिश मानी तो कृभको, एयर इंडिया, पवन हंस जैसी कंपनियों का प्राइवेटाइजेशन हो सकता है।
  • वित्त वर्ष 2016-17 में सेवा क्षेत्र में 8.9%, औद्योगिक क्षेत्र में 5.2% की दर से वृद्धि का अनुमान जताया गया है। पिछले वित्त वर्ष में इंडस्ट्री सेक्टर ने 7.4% की दर से वृद्धि दर्ज की थी। मौजूदा वित्त वर्ष में कृषि क्षेत्र के 4.1 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले यह 1.2 प्रतिशत ज्यादा है।
  • इकनॉमिक सर्वे में श्रम और कर नीतियों में बदलाव की सिफारिश की गई है ताकि परिधान और चमड़ा क्षेत्र को बढ़ावा मिले और ये दोनों विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लायक बन सकें।
  • सर्वे में सेंट्रलाइज्ड पब्लिकर सेक्टर ऐसेट रीअबिलिटेशन एजेंसी की स्थापना की सिफारिश की गई है।

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