दिल्लीः डीटीसी में 8 करोड़ का घपला

DTC BUSनोटबंदी के चलते दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) में अधिकारियों ने मिलीभगत कर 8 करोड़ रुपये का घपला कर दिया। टिकट के रूप में जनता से जो पैसे आए थे उन्हें 500 और एक हजार के नोट में बदल कर खजाने में जमा करा दिए गए। मामला प्रकाश में आने पर दिल्ली के परिहवन मंत्री सत्येंद्र जैन ने विभागीय जांच के आदेश दिए थे। जांच में प्राथमिक स्तर पर ही घपला किए जाने की बात सामने आ रही है। जिस पर मंत्री सत्येंद्र जैन ने दोषी अधिकारियों को निलंबित करने के आदेश देकर मामले को भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) को सौंप दिया है।

दिल्ली सरकार के पास 19 नवम्बर को नोटबंदी के चलते नोट बदलने के घपले के बारे में शिकायत आई थी। जिस पर सरकार ने डीटीसी के सीएमडी को जांच के आदेश दिए थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि शिकायतें सही पाई गई हैं। दिल्ली सचिवालाय में मीडिया से बात करते हुए परिवहन मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि आठ नवंबर 2016 की रात को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐलान की वजह से 12 बजे के बाद से पुराने नोट बंद हो गए थे, जिसकी वजह से 9 तारीख को ही हमने सभी डीटीसी डिपो को आदेश जारी करके पुराने नोट न लेने का आदेश दिया था।

बावजूद इसके 9 से 19 तारीख तक डीटीसी के डिपो द्वारा जो पैसा जमाया कराया जा रहा था। उसमें 99.9 से लेकर 98 फीसद तक नोट पुराने एक हजार और पांच सौ के थे। मंत्री ने कहा कि जब पुराने नोट लेने से साफ मना कर दिया था, तो इसके बाद पुराने नोट जमा होन जांच का विषय है।

सत्येंद्र जैन के मुताबिक, 9 नवंबर से 19 नवंबर तक 8 करोड़ 14 लाख और 85 हजार रुपये की रकम जमा की गई। उन्होंने शक जताया है कि हो सकता है कि कई अधिकारियों ने रिश्वत के कालेधन को सफेद किया होगा या फिर कमीशन लेकर पुराने नोट के बदले छोटी करैंसी दी होगी, इसलिए हमने परिवहन आयुक्त को आदेश देकर एसीबी से इसकी गहनता से जांच कराने की बात कही है।

इसके साथ ही दोषी लोगों तो तुरंत निलंबित करने के आदेश दिए गए। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि डीटीसी में सभी नोट पांच सौ और हजार के आएं। उन्होंने सवाल किया कि अगर इतनी बढ़ी मात्रा में बढ़े नोट आए, तो खुले पैसे डीटीसी के पास कहां से आए।

दिल्ली के परिवहन मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि नोटबंदी के फैसले के वजह से दिल्ली परिवहन निगम को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है, क्योंकि नोटबंदी की वजह से सवारियों की संख्या आधी हो गई है। डीटीसी में नोटबंदी से पहले रोजना करीब दो करोड़ से लेकर ढाई करोड़ रुपये तक की कमाई होती थी, लेकिन अब आधी हो गई है।

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