गुजरात में करो या मरो की स्थिति मोदी और राहुल के लिए

Modi with rahulनरेंद्र मोदी के सीएम से पीएम बनने के सफर में सबसे बड़ी भूमिका गुजरात की है। मोदी गुजरात विकास मॉडल के नाम पर ही देश के सिंहासन पर काबिज हुए हैं। इसी कारण एक तरफ विपक्ष उनके ही दुर्ग में में मात देने के लिए जोर आजमाइश कर रही है। वहीं दूसरी तरफ मोदी अपने अभेद दुर्ग को बचाने के लिए पूरा दमखम लगा रखे हैं। इस वजह से मानो 2019 की लड़ाई 2017 में गुजरात में लड़ी जा रही है। यदि गुजरात में भाजपा को जीत मिलती है तो मोदी और मजबूत होंगे तो वहीं यदि कांग्रेस की जीत होती है तो राहुल गांधी की लॉन्चिंग होगी।

गुजरात भाजपा पिछले पांच विधानसभा चुनावों में लगातार जीत दर्ज करके पिछले दो दशक से सत्‍ता के सिंहासन पर काबिज है। भाजपा गुजरात विधानसभा की सियासी रणभूमि को छठी बार अपना वर्चस्‍व बरकरार रखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संभालने के लिए खुद उतर गए है। नरेंद्र मोदी 2002 में गुजरात के पहली बार मुख्‍यमंत्री बने और फिर सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़ते गए। मोदी लगातार तीन बार मुख्‍यमंत्री बने और 2014 में करिश्‍माई जीत दर्ज करके देश के प्रधानमंत्री बने।

2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात छोड़ दिल्‍ली आने के बाद से भाजपा को राज्‍य में एक विश्‍वसनीय चेहरा नहीं मिल पाया है जो जनता को रुझान अपने पक्ष में कर सके। इतना ही नहीं नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद गुजरात में बीजेपी की पकड़ धीरे-धीरे कमजोर होती गई। गुजरात की जनता भाजपा सरकार के खिलाफ सड़क पर आंदोलन करने को मजबूर हो गए। पाटीदार से लेकर दलित समुदाय तक भाजपा से दूर होते जा रहे हैं। अब तो गुजरात के विकास मॉडल पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं।

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