दिव्यांगों को सशक्त बनाने के लिए राष्ट्रीय सेमिनार : शिक्षा और वित्तीय सामर्थ्य से दिव्यांग होंगे सशक्त

IMG_8100नई दिल्ली। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अनिल कुमार खाची ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने सबसे पहले विकलांगों को दिव्यांग नाम दिया और उसके बाद इन्हें सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार दिव्यांगों की बेहतरी के लिए कई कार्यक्रम चला रही है। मुद्रा, एनपीसीआई जैसी कई योजनाओं का लाभ लोगों को होगा। समाज के हर तबके को लाभ मिलेगा। श्री खाची भारत में दिव्यांगों के वित्तीय समावेशन पर आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी के उदघाटन सत्र में बोल रहे थे। इसका आयोजन सोसाइटी फाॅर डिसएबिलिटी एंड रिहेबिलेशन स्टडीज, एसडीआरएस नई दिल्ली ने किया था।

इससे पहले एसडीआरएस के डाॅ जीएन कर्ण ने दो दिवसीय संगोष्ठी की पूरी रूपरेखा बताई। इस दौरान एसडीआरएस की ओर से एक स्मारिका का विमोचन भी अतिथियों ने किया। जेएनयू के पूर्व कुलपति प्रो सुधीर कुमार सपोरी ने अपने वक्तव्य में दिव्यांगों के शैक्षणिक स्थिति और केंद्र सरकार की कई कार्यक्रमों का जिक्र किया। उन्होंने सुझाव दिया कि जब दिव्यांग भी शिक्षित होंगे, तो वे अपने अधिकारों की बात करेंगे। समाज उन्हें स्वयं सशक्त मानने लगेगा।

संगोष्ठी में डाॅ. मदनेश कुमार मिश्र, आई.आर.एस. (संयुक्त सचिव, वित्तीय सेवा विभाग/वित्त मंत्रालय, भारत सरकार) डाॅ. एस. के. प्रसाद (भारत सरकार के उप-मुख्य विकलांगता आयुक्त), श्री पी.सी. दास, आई.सी.ए.एस. (अध्यक्ष-सह-प्रबन्ध निदेशक, नेशनल हैण्डीकैप्ड फाइनेन्स एण्ड डेवलपमेन्ट काॅरपोरेशन) तथा प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एवं भारतीय प्रबन्धन संस्थान, बंगलोर के प्रो. चरण सिंह सहित कई गणमान्य लोगों ने अपने विचार रखें।

एसडीआरएस के अजय कर्ण ने बताया कि हमारी पूरी कोशिश होती है कि हम सामाजिक सरोकारों का पालन करते हुए समाज के सभी वंचितों को उनका अधिकार दिलाए। हमारी कोशिश होती है कि समाज का हर व्यक्ति शिक्षित हो। कोई भी इंसान जब शिक्षित होगा, तो सशक्त बनने के रास्ते खुद ब खुद खुल जाते हैं। सभी वक्ताओं ने दिव्यांगों को सशक्त बनाने में अपना यथासंभव सहयोग देने की बात की और सामाजिक सरोकारों को इंगित किया। शामिल हैं।

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