करेंसी बैन: प्लान इतना गुप्त था कि कैबिनेट को तक भनक नहीं

RBIप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 500 और 1000 रुपये के नोट्स को डिमोनेटाइज करने का ट्रंप कार्ड 6 महीने तक गुप्त रखा गया. ईटी नाउ की रिपोर्ट के अनुसार ब्लैक मनी को निकालने के लिए इस प्लान पर इस साल मई से काम शुरू हो गया था, लेकिन लीक से बचाने के लिए इस पूरे प्लान को गुप्त रखा गया.
साल के शुरुआत में ही पीएम नरेंद्र मोदी ने देश में 500 और 1000 के नोटों को बदलने के लिए आरबीआई के चुनिंदा अधिकारियों से बात कर ली थी. 2300 करोड़ रुपये के नोटों को पूरी तरह से बदलना आसान काम नहीं था. यह पूरा काम इतना गुप्त रखा कि पीएम ने कैबिनेट को तक इसकी भनक नहीं लगने दी. कैबिनेट को इसकी जानकारी मंगलवार रात दिए गए पीएम के संबोधन से थोड़ा पहले दी गई.
पीएम नरेंद्र मोदी का जोर इस बात पर था कि कैसे ब्लैक मनी के ट्रांजैक्शन को रोक कर इकॉनमी में रफ्तार लाई जाए. पीएम को यह पता था कि अगर उनका दांव सही बैठता है तो लोगों को ट्रांजैक्शन के लिए कानूनी तरीके ही अपनाने पड़ेंगे जिससे सरकार को अधिक टैक्स भी मिलेगा.
रिपोर्ट के अनुसार इस पूरे प्लान पर लगाए लोगों को कुछ दिनों के लिए पूरी तरह से निगरानी में रखा गया जिससे प्लान की जानकारी लीक होने की संभावना न बचे. प्लान के सारे कागजात वहीं बनाए गए जहां बहुत गोपनीय तरीके से बजट प्रिंट होता है. यहां तक कि कैबिनेट के लोगों को जब इसके प्लान की जानकारी मंगलवार शाम दी गई इसके बाद उन्हें तभी जाने दिया गया जब पीएम का संबोधन पूरा हो गया. रिपोर्ट के अनुसार इस पूरे प्लान का एक मकसद विरोधियों का काले धन पर सरकार के नर्म होने का जवाब देना भी था. इसके अलावा बीजेपी को यूपी चुनावों के पहले जनता बीच जाने के लिए मजबूत पक्ष भी गया.

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