दोस्त, लवर के अलावा और भाईबहन भी

rakhiसमाज बदल रहा है. लड़का लडकी अब प्रेमी हो सकते हैं. दोस्त भी हो सकते हैं तो फिर भाई बहन क्यों नहीं हो सकते. समाजशास्त्री  भी मानते हैं कि, ‘मुंहबोले भाई और बहन का प्यार अब देखने के लिए नहीं मिलता है, इसका प्रमुख कारण लड़का और लड़की को लेकर समाज के नजरिये में आया बदलाव है। पहले लड़की को समाज में लड़कों के बराबर का हक नहीं होता था। किसी लड़की का कोई भाई न हो तो उसे बेचारगी से देखा जाता था। राखी या भाई दूज जैसे त्योहारों पर लोग भाई न होने का ताना कसने से नहीं चूकते थे। लेकिन अब समाज की सोच और स्थिति दोनों बदल चुकी है। अब चाहे संतान लड़का हो या लड़की, कई परिवारों में न तो माता-पिता को इससे कोई फर्क पड़ता है और न ही समाज में इस बात को लेकर अब पहले जैसा पूर्वाग्रह रह गया है।

बैंक पीओ रचना गेरा के अनुसार, ‘जहां तक मुंहबोले भाई-बहन बनाने की बात है, तो मैंने कभी भी इस तरह के रिश्तों को नहीं माना। अगर आपका भाई नहीं है, तो फिर किसी को राखी बांधकर भाई बना लेने से वह आपका भाई नहीं बन सकता। हम तीन बहने हैं, लेकिन कभी भी हमारे दिल में यह ख्याल नहीं आया कि हम किसी को अपना भाई बना लें। बचपन में राखी के दिन जब लोग हमें बेचारगी से देखते थे, तो जरूर बुरा लगता था, लेकिन जब पापा ने हमें यह समझाया कि हम उनके लिए बेटे से कम नहीं, तो फिर हमने कभी पीछे मुडकर नहीं देखा। हम तीनों बहनें आपस में एकदूसरे को राखी बांध लेती हैं। आज हम तीनों अपनी जिंदगी में व्यस्त हैं। कभी भी हमें भाई की कमी महसूस नहीं हुई।  कई बार कोई लड़का घर पर  अकेले संतान होता है. उसे कभी भी बहन का प्यार नहीं मिलता . ऐसे में वह चाहता है कि कोई लडकी उसकी मुंह बोली बहन भी बन जाए. इसमें बुराई क्या है.

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