एक जुलाई से शराब जीएसटी से बाहर, फिर भी जोर का झटका देगी

Drinkशराब जीएसटी से बाहर रहने के बावजूद शराब पीने के शौकिनों को एक जोर का झटका धीरे से दे सकती है। जीएसटी लागू होने के बाद 1 जुलाई से ही ऐल्कॉहॉल या ऐल्कॉहॉल से बनी किसी भी आइटम के रेट बढ़ सकते हैं। हालांकि शराब को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है। वहीं इसकी लागत बढ़ने से भी कोई इनकार नहीं कर रहा है। ऐल्कॉहॉल इंडस्ट्री का मनना है कि लागत बढ़ने से कंपनियों का लाभ दबाव में आ सकता है। इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस वजह से कंपनियों को अपना थोड़ा दबाव ग्राहकों की तरफ शिफ्ट करना पड़ सकता है।
भले ही आप, विस्की, रम, वोडका, जिन, या कोई भी ऐल्कॉहॉल लें, आपको नशे का झटका देने से पहले वह आपकी जेब को जोर का झटका दे सकती है। ऑल इंडिया ब्रुअर्स असोसिएशन के डायरेक्टर जनरल शोभान रॉय का कहना है, ‘जीएसटी लागू होने के बाद इसकी लागत में 12-15 पर्सेंट की बढ़ोतरी होगी। इस कारण कंपनियों पर लाभ को लेकर दबाव होगा, और कंपनियां उस दबाव को कम करने के लिए ग्राहकों का सहारा लेंगी।’ यह असोसिएशन देश भर की बियर कंपनियों का एक समूह है, जिसमें देश और विदेश की कई बड़ी बियर कंपनियों का प्रतिनिधित्व है।
रॉय ने बताया कि इसका सबसे ज्यादा असर बियर की लागत पर पड़ेगा। बियर की लागत करीब 15 प्रतिशत बढ़ जाएगी। रॉय का कहना है कि लिकर और इससे जुड़े प्रॉडक्ट की लागत 12 प्रतिशत बढ़ सकती है। कांच की बोतलों को 18 प्रतिशत टैक्स के दायरे में रखा गया है, जबकि इससे पहले यह दायरा 15 प्रतिशत तक था। वहीं गुड़ को सबसे ज्यादा 28 प्रतिशत के टैक्स ब्रैकेट में रखा गया है। ट्रांसपोर्ट टैक्स 4.5 पर्सेंट से 5 पर्सेंट तक आ गया है। जबकि सर्विस टैक्स 15 से 18 प्रतिशत हो गया है।

कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन ऐल्कॉहॉलिक बेवरेज कंपनीज के डीजी प्रमोद कृष्णा को उम्मीद है कि लिकर कंपनियां और सरकार मिलकर कोई न कोई रास्ता जरूर निकाल लेंगे, ताकि कीमतें न बढ़ें। उन्होंने कहा, ‘कुछ आइटम्स की कीमत वाकई ज्यादा हो सकती है, लेकिन कुल मिलाकर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। हम सरकार के साथ पूरे मामले पर काम कर रहे हैं।’

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