एयर इंडिया की घर वापसी होगी!

air india पिछले एक दशक से घाटे में चल रही सरकारी एयरलाइन एयर इंडिया को सरकार से खरीदने में टाटा ग्रुप ने दिलचस्पी दिखायी है। यदि टाटा ग्रुप एयर इंडिया को खरीदने में सफल रहा तो, एयर इंडिया के लिए यह घर वापसी जैसा होगा। 1953 में एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण होने से पहले इसका मालिक टाटा ग्रुप ही था।

टाटा ग्रुप के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने सरकार के साथ अनौपचारिक बातचीत में एयर इंडिया में 51 पर्सेंट इक्विटी के साथ कंट्रोलिंग स्टेक खरीदने में शुरुआती दिलचस्पी दिखाई है। टाटा ग्रुप यह डील सिंगापुर एयरलाइंस के साथ पार्टनरशिप में कर सकता है।

एयर इंडिया पर 52,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है। इसके लिए कुल 30,000 करोड़ रुपये का पैकेज मंजूर किया गया था, जिसमें से एयरलाइन को लगभग 24,000 करोड़ रुपये मिल चुके हैं।

एयर इंडिया में अगर टाटा ग्रुप कंट्रोलिंग स्टेक खरीदता है तो यह इतिहास के दोहराने जैसा होगा। एयरलाइन वापस उसी ग्रुप के पास चली जाएगी, जिसने इसे दुनिया की बेहतरीन एयरलाइंस की कतार में शामिल किया था। हालांकि, एयरलाइन पर सरकारी नियंत्रण होने के बाद इसकी स्थिति बिगड़ गई।

टाटा ग्रुप पहले ही भारतीय एविएशन सेक्टर में अपने दो ज्वाइंट वेंचर के साथ मौजूद है। इनमें से एक मलेशिया की एयर एशिया के साथ एयर एशिया इंडिया और दूसरा सिंगापुर एयरलाइंस के साथ पार्टनरशिप में फुल सर्विस एयरलाइन विस्तारा का है।

एयर इंडिया का मूल नाम टाटा एयरलाइन था, जिसे टाटा ग्रुप के संस्थापक जे आर डी टाटा ने 1932 में लॉन्च किया था। स्वतंत्रता के बाद इसे विदेशी उड़ानों को शुरू करने के लिए सरकार और प्राइवेट सेक्टर के बीच एक ज्वाइंट वेंचर के तौर पर 1948 में एयर इंडिया इंटरनेशनल बनाया गया था। इसके पांच वर्ष बाद सरकार ने एविएशन इंडस्ट्री का राष्ट्रीयकरण कर दिया और यह एयरलाइन सरकार के नियंत्रण में आ गई।

जे आर डी टाटा को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के इस फैसले से काफी निराशा हुई थी। उन्होंने नेहरू को लिखे एक पत्र में कहा था, ‘मैं इस पर केवल दुख जता सकता हूं कि इतना महत्वपूर्ण कदम हमारा पक्ष सुने बिना उठाया गया है।’

इसके बावजूद नेहरू के जोर देने पर टाटा एयरलाइन का राष्ट्रीयकरण होने के बाद उसका चेयरमैन बनने के लिए सहमत हुए थे। उनकी अगुवाई में एयर इंडिया का अच्छा प्रदर्शन जारी रहा था, लेकिन 1977 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के टाटा को हटाए जाने के बाद एयरलाइन लगातार मुश्किलों का सामना करती रही।

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