सत्ता और पद के अहंकार के नशे का भी परित्याग करें : राज्यपाल रामनाथ कोविंद

ramnath kovind governor of biharराज्यपाल रामनाथ कोविंद ने कहा कि शराबबंदी कानून लागू करने में मेरी भी भूमिका है। मुख्यमंत्री के इस ऐतिहासिक कदम को मैंने भी सहमति दी। शराबबंदी बिल को राज्यपाल की सहमति देनी थी। विभिन्न क्षेत्रों के लोग इस पर सहमत नहीं थे। कुछ ने इसे तानाशाही कानून बताया। लेकिन मैंने लोगों के कल्याणकारी इस बिल को तत्काल ही सहमति दे दी।

पूर्ण शराबबंदी का ऐतिहासिक निर्णय फिलहाल सिर्फ शराब पर लागू होता है, जबकि सभी तरह के नशे को इसकी जद में लाना चाहिए. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि यह सम्मान पूरे बिहारवासी का सम्मान है और मैं भी बिहार का हूं. इसलिए इस सम्मान में मैं भी आता हूं. इस पर सीएम, आचार्य श्री समेत सभी हंसने लगे. इसलिए इस सम्मान में शामिल होने आया हूं. राज्यपाल ने कहा कि नशा कई तरह के होते हैं, सत्ता, पद, प्रतिष्ठा, धन-संसाधन, संपन्नता का नशा भी होता है. परंतु ये नशा लोगों में अहंकार के रूप में मौजूद रहते हैं. सामाजिक पतन के लिए ये नशा प्रमुख हैं. उन्होंने कहा कि जब यह पूर्ण शराबबंदी कानून विधानमंडल से पास होने के बाद अंतिम अनुमोदन के लिए आया था. तब कई लोगों ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि यह तानाशाही कानून है, लोगों के मौलिक अधिकार का हनन है.

इस पर मैंने सभी प्रबुद्ध लोगों से तीन बातें पूछी कि क्या इस तरह के कानून के लिए विधानमंडल सक्षम है, यह कल्याणकारी कदम है या नहीं और सरकार की नियत ठीक है या नहीं. तीनों सवाल के जवाब ‘हां’ में मिलने के बाद इस कानून को लागू करने के लिए हस्ताक्षर कर दिया.

अणुव्रत पुरस्कार समारोह में राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने कहा है कि बिहार गौरवशाली प्रदेश रहा है. जैन धर्म के 24 में 22 तीर्थंकर का निर्वाण स्थल बिहार और झारखंड ही रहा है. आचार्य श्री महाश्रमण की इस अहिंसा यात्रा ने बिहारवासियों में आध्यात्मिक चेतना जगाने का काम किया है. आज पूरी दुनिया तकलीफ और हिंसा से त्रस्त है. ऐसे में सभी भारत की तरफ आध्यात्मिकता की ललक से देख रहे हैं. उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी के अच्छे परिणाम दिख रहे हैं. वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस पुरस्कार के लिए चुने जाने पर बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि वह सह्रदयता, विनम्रता और सुशासन की प्रतिमूर्ति हैं.

राज्यपाल ने कहा कि आज सम्पूर्ण विश्व हिंसा और आतंकवाद से त्रस्त है। सभी पुन: भारतवर्ष की ओर आशाभरी निगाहों से देख रहे हैं। जीवन का सदुपयोग कैसे हो? इस विषय में भारतीय राष्ट्रसंतों और महात्माओं ने अपने संदेशों से बराबर जन-मानस का मार्गदर्शन किया है। राज्यपाल ने अणुव्रत पुरस्कार से सम्मानित मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बधाई दी। राज्यपाल ने कहा कि अन्य नशा की तरह सत्ता और पद के अहंकार के नशे का भी हमें परित्याग करना चाहिए।

अपने पर अपना अनुशासन होना चाहिए : आचार्यश्री महाश्रमण ने कहा कि छोटे-छोटे नियमों को अपना कर गृहस्थ जीवन को लोग बेहतर बना सकते हैं। अपने पर अपना अनुशासन होना चाहिए। उन्होंने वहां मौजूद सैकड़ों लोगों को शराब नहीं पीने का संकल्प भी दिलाया। उन्होंने कहा कि सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति के अभियान को हम सभी पैदल यात्रा पर निकले हैं।

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