9/11 का भूत : अमेरिका का पीछा नहीं छोड़ेगा

towers-flames9/11 की त्रासदी भुलाने के दिन ही अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प नाम का हादसा हो गया। लगता है यह तारीख अमरीका के लिए बड़ी अशुभ है।

9/11 एक ऐसी तारीख है जिस से दुनिया का सबसे ताकत वर मुल्क घबराता है। इस तारीख को सुनते हरर उसके पसीने छूट जाते हैं। इसी दिन इसकी मजबूत किलों में सेंध लगाकर अल कायदा ने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन जैसी बहुमंजिला इमारतों पर आतंकी हमला किया था। सबसे शक्तिशाली मुल्क को घुटनों पर आते पूरे विश्व ने देखा। आज फिर वही दिन है, जाहिर है अमेरिका को वो कड़वे दिन याद आ गए होंगे।

हालांकि 9/11 का भूत शायद अमेरिका का पीछा छोड़ना ही नहीं चाहता। इसलिए इसी दिन उसे डोनॉल्ड ट्रम्प के रूप में सबसे विवादित, एयाश, महिला विरोधी राष्ट्रपति मिला है। यह अमेरिका का दुर्भाग्य ही है क़ि जहाँ ओबामा के बाद अमेरिका की पहली महिला राष्ट्रपति हिलेरी क्लिंटन को चुनकर इतिहास रचा जा सकता था, वहाँ ट्रम्प जैसा मुंहफट व्यक्ति प्रेजिडेंट बन बैठा है।

जब उस पर इस दिन आतंकी हमला हुआ था तब दोष बाहर से हवाई जहाज में आये आतंकी समूह का था लेकिन इस दफा तो अमेरिका की वाट लगाने का वाला कोई और नहीं खुद अमेरिकी जनता है।

इस दिन से अमेरिका को सिर्फ नुक्सान हुआ है। पहले उसके नागरिकों ने जान खोई, माल खोया और सुरक्षा को लेकर शर्मिंदगी भी झेली पर डोनाल्ड के चुनाव जीतने से दुनिया का सबसे मजबूत लोकतंत्र अपनी मजबूत नींव पर पकड़ खोता जा रहा है।
राजनीति जानकार मानते हैं कि डोनाल्ड अमेरिका के अब तक सबसे कमजोर और नाकाबिल प्रेजिडेंट हैं जो सिर्फ पैसों के दम पर चुनाव जीतना जानते हैं। अब तो अगले साल की 9/11 को पता नहीं अमेरिका का क्या होगा?

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